हरियाणा के सबसे चर्चित IAS अधिकारी अशोक खेमका आज रिटायर हो गए हैं. खेमका देश के उन गिने-चुने अफसरों में शामिल, जो सिस्टम से नहीं, सिस्टम में रहते हुए सिस्टम से लड़े. हरियाणा कैडर के 1991 बैच के IAS अफसर खेमका का नाम सुनते ही दो शब्द याद आते हैं – ईमानदारी और तबादला. ऐसा इसलिए क्योंकि 34 साल के सेवाकाल में उन्होंने 57 बार तबादले झेले, फिर भी न अपने सिद्धांतों से डिगे और न ही झुके.
30 अप्रैल 1965 को कोलकाता में जन्मे खेमका न सिर्फ एक तेजतर्रार प्रशासक रहे, बल्कि एक शानदार शैक्षणिक पृष्ठभूमि के धनी भी हैं. उन्होंने IIT खड़गपुर से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. इसके बाद TIFR से पीएचडी की.
वाड्रा-DLF मामला और सुर्खियां
2012 में जब खेमका ने गुरुग्राम में रॉबर्ट वाड्रा और DLF के बीच हुए विवादित ज़मीन सौदे का म्यूटेशन रद्द किया, तब उन्हें देशभर में पहचाना गया. इस कदम से उन्होंने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी, लेकिन नतीजा तबादला रहा. आज भी यह मामला अधर में है, लेकिन उस एक कार्रवाई ने खेमका को जनता के नायक के रूप में स्थापित कर दिया.
खेमका ने केवल जमीन घोटाले ही नहीं, बल्कि परिवहन विभाग में भी कई बेहतरीन सुधार किए. 2014 में उन्होंने बिना जांच बड़े वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया, जिससे हड़तालें भी हुईं और उन्हें एक बार फिर तबादला मिला.
खेमका का आखिरी तबादला
दिसंबर 2024 में उन्हें प्रिंटिंग व स्टेशनरी विभाग से हटाकर परिवहन विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव बनाया गया. यह उनका 57वां तबादला और सेवा का अंतिम पड़ाव था. आज वे इसी पद से रिटायर हुए. हरियाणा IAS एसोसिएशन ने चंडीगढ़ में उनके लिए एक भावनात्मक विदाई समारोह आयोजित किया.
NEWSANP के लिए हरियाणा से ब्यूरो रिपोर्ट

