दानवीर भामाशाह की जयंती, केंदबोना में उत्सव का माहौल, बाबासाहेब के विचारों से जुड़ी प्रेरणा की कथा…

दानवीर भामाशाह की जयंती, केंदबोना में उत्सव का माहौल, बाबासाहेब के विचारों से जुड़ी प्रेरणा की कथा…

जामताड़ा(JAMTADA): इतिहास के दो महानायक—एक दानवीर और एक संविधान निर्माता—जब स्मृति और प्रेरणा के मंच पर एक साथ प्रतिष्ठित किए जाएं। तो वह आयोजन सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं रह जाता। बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक दिशा-संकेत बन जाता है। मंगलवार को जामताड़ा प्रखंड के केंदबोना ग्राम में दानवीर भामाशाह की जयंती ऐसे ही भावों से ओतप्रोत माहौल में मनाई गई। जिसमें बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की भूमिका की भी गूंज सुनाई दी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता चांदो मंडल ने की जबकि उपाध्यक्ष के रूप में कृष्णा साहू उपस्थित रहे। आयोजन में सैकड़ों ग्रामीणों की भागीदारी ने यह दर्शाया कि भामाशाह जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्व आज भी जनमानस में जीवंत हैं। भामाशाह, जिनका जन्म 29 अप्रैल, 1547 को राजस्थान के मेवाड़ में हुआ था। महाराणा प्रताप के सबसे विश्वासपात्र सहयोगियों में से थे। हल्दीघाटी के बाद जब मेवाड़ आर्थिक संकट में था। तब उन्होंने अपनी संपूर्ण संपत्ति राष्ट्र रक्षा हेतु दान कर दी थी। यह निःस्वार्थ दान—20 लाख स्वर्ण मुद्राएं एवं 2.5 करोड़ चांदी के सिक्के—इतिहास में त्याग की पराकाष्ठा के रूप में दर्ज है।

कार्यक्रम के दौरान बाबा नायक जनकल्याण समिति के संस्थापक दुबराज मंडल ने कहा कि “भामाशाह का त्याग और समर्पण अगर हमें आज भी प्रेरित करता है। तो डॉ. अंबेडकर का संविधान निर्माण, उनके सामाजिक न्याय के विचार और समानता का सपना हमें रास्ता दिखाते हैं। एक ने तलवार और खजाने से राष्ट्र की रक्षा की। तो दूसरे ने क़लम और संविधान से समाज को सशक्त किया।”

इस क्रम में भामाशाह की स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने हेतु एक प्रतीकात्मक चबूतरे का निर्माण किया गया। जिसका अनावरण ग्राम की नारी शक्ति की अध्यक्ष आभा आर्या एवं अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में किया गया। दुबराज मंडल ने युवाओं से आह्वान किया कि वे भामाशाह की तरह राष्ट्र के लिए समर्पण और अंबेडकर की तरह समाज के लिए प्रतिबद्धता को अपनाएं।

इस आयोजन में इतिहास की छाया वर्तमान पर भी पड़ी। पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा करते हुए सभा में दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। यह दर्शाता है कि देशभक्ति आज भी हमारे समारोहों का मूल तत्व बनी हुई है।

सामूहिक सहभागिता और सामाजिक चेतना की झलक

इस आयोजन में ग्राम समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी दिखी। प्रमुख रूप से उपस्थित रहे: कृष्णा साहू, पंचानंद शंभू माझी, तपेश मंडल, गणेश मंडल, पुष्पा कुमारी, बुद्धो मंडल, युवा समाजसेवी विनोद मंडल, वीरेन मंडल, सुभाष माझी, मधु रावत, बैजनाथ मंडल, प्रदीप कुमार मंडल, जितेन मंडल, विजय मंडल, अरुण शाह, तापस मंडल, बीएन मंडल, गंगाधर मंडल, संतोष मंडल, मनोरंजन मंडल, उदय मंडल, निमाई मंडल, माधव चंद्र तेली, जगदीप मंडल, प्रेम मंडल, रणजीत राणा, कैलाश ठाकुर, राजेश मंडल, रमेश भंडारी, गौरीशंकर मंडल, अधिवक्ता वेद प्रकाश मंडल, सुकुमार मंडल, बलराम मंडल, प्रहलाद मंडल, चरण मंडल, राजेन मंडल, मुकेश मंडल, मुन्ना मंडल, मुकेश रावत समेत सैकड़ों ग्रामीण।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत और ‘जय भामाशाह – जय भीम’ के उद्घोष से हुआ, जो यह दर्शाता है कि भारत के इतिहास और वर्तमान के दो स्तंभ—भामाशाह का त्याग और अंबेडकर का विचार—किस तरह ग्राम्य भारत में सामाजिक पुनर्जागरण का आधार बन रहे हैं।

NEWSANP के लिए जामताड़ा से आर पी सिंह की रिपोर्ट

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