पश्चिम बंगाल(WEST BENGAL): पश्चिम बंगाल पुरुलिया का झालदा इलाका कश्मीर के पहलगांव मे हुए आतंकी हमले मे सहीद हुए आईबी अधिकारी मनीष रंजन की शोक मे डूब चूका है, एक तरफ जहाँ मनीष की सहादत की खबर सुन मनीष के घर नेता मंत्रियों और झालदा इलाके के लोगों सहित मनीष के संगे सम्बंधियों का आना -जाना लगा है तो वहीं दूसरी ओर मनीष का बचपन का दोस्त मनोज रोंगटा मनीष की सहादत की खबर सुन सुबह से ही मनीष के घर के दरवाजे पर टकटकी लगाए बैठा है, अपने दोस्त के इंतजार मे वह दोस्त जिस दोस्त के साथ वह खेला कुदा साथ पढ़ाई लिखाई की एक थाली मे मिल बांटकर खाई जिंदगी के कई महत्वपूर्ण लम्हे साथ बिताई, मनोज यह कहकर तब फफ़क़ -फफ़क़ कर रोने लगा जब उससे मनीष के साथ बिताए पल के बारे मे पूछा गया, मनोज ने कहा ऐसा कोई पल नही होगा जो दोनों दोस्तों ने मिलकर नही बिताई हो, मनीष के नौकरी लगने के बाद भी वह हर रोज किसी ना किसी बहाने फोन पर बात करते रहते एक दूसरे का हाल -चाल जानते, मनोज की अगर माने तो कई बार मनीष ने उसको मुश्किल से मुश्किल घड़ी मे उसका सांथ दिया है, उसकी हर समस्या मे मनीष एक ढाल बनकर खड़ा हो जाता और हर बुरी से बुरी परिस्थिति से उसको बाहर निकाल लाता, मनोज की अगर माने तो मनीष उसकी जिंदगी मे सबकुछ था, मनीष के यूँ चले जाने से वह पूरी तरह बिखर चूका है, टूट चूका है उसको कोई रास्ता नही दिख रहा की वह किस रास्ते पर चले उसके रास्ते का हर मंजिल मनीष था इस लिये वह अपनी दोस्त की आने का राह तक रहा है वह कब आएगा उसके इंतजार मे उसकी आंखे पथरा सी गई है, मेरा दोस्त हम सबको छोड़कर हमेशा हमेशा के लिये चला गया यह कहकर खुदको रोक नही पाया मनोज और खूब रोया, वहीं मनीष के एक और मित्र बबलू कुमार का भी रो रोकर बुरा हाल था, बबलू ने कहा वह एक मैकेनिक है, पर जब से उसने मनीष की सहादत की खबर सुनी है उसका मन काम मे नही लग रहा वह ठीक से काम नही कर पा रहा वह जैसे तैसे समय काट रहा और सुबह होने का इंतजार कर रहा की कब सुबह हो और वह अपने दोस्त मनीष को एक झलक देख पाए और वह मनीष की अंतिम यात्रा मे शामिल हो पाए साथ ही अपने दोस्त की नम आँखों से विदाई दे पाए.
NEWSANP के लिए पश्चिम बंगाल से अतीक रहमान की रिपोर्ट

