जामताड़ा(JAMTADA): 22 अप्रैल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर इन दिनों एक पोस्ट ने जबरदस्त हलचल मचा रखी है, जिसमें भाजपा के समर्पित नेताओं और प्रवक्ताओं को पार्टी नेतृत्व द्वारा अनदेखा किए जाने की शिकायत सामने आई है। #NishikantDubey, #WeSupportNishikantDubey, and #WeAlsoHaveFreedomOfExpression are just a few of the hashtags that have been used. यह पोस्ट विशेष रूप से भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व और अध्यक्ष पर गहरी नाराज़गी जाहिर करता है कि कैसे पार्टी के निष्ठावान नेताओं और कार्यकर्ताओं को ‘बीच मझधार में छोड़ दिया गया’।
मुख्य बिंदु जिन पर कार्यकर्ताओं ने नाराज़गी जताई है:
- सांसद डॉ. निशिकांत दुबे की उपेक्षा:
झारखंड के चर्चित सांसद डॉ. निशिकांत दुबे, जो निरंतर जन मुद्दों को संसद और सड़क दोनों पर उठाते रहे हैं, उन्हें पार्टी की ओर से अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा। सोशल मीडिया यूजर्स इसे ‘अन्याय’ की संज्ञा दे रहे हैं। - सांसद दिनेश शर्मा की आवाज को अनसुना करना:
भाजपा के एक अन्य सांसद दिनेश शर्मा के वक्तव्यों और जन भावना को पार्टी नेतृत्व द्वारा दरकिनार किए जाने की शिकायत भी सामने आई है। - राष्ट्रीय प्रवक्ताओं की अनदेखी:
- शहजाद पूनावाला (राष्ट्रीय प्रवक्ता)
- नूपुर शर्मा (पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता)
इन दोनों नेताओं को संकट की घड़ी में पार्टी द्वारा खुला समर्थन न देना सोशल मीडिया यूजर्स के गुस्से की वजह बन गया है।
- कंगना रनौत पर हमला और चुप्पी:
हाल ही में पंजाब में अभिनेत्री और मंडी से भाजपा की नव निर्वाचित सांसद कंगना रनौत पर हमले के बावजूद पार्टी नेतृत्व द्वारा ठोस प्रतिक्रिया न देना भी व्यापक असंतोष का कारण बना। - बंगाल और केरल में भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या पर उदासीनता:
वर्षों से बंगाल और केरल में भाजपा कार्यकर्ताओं की राजनीतिक हत्याओं को लेकर पार्टी नेतृत्व की ‘नरम प्रतिक्रिया’ पर भी सोशल मीडिया यूजर्स सवाल उठा रहे हैं।
विपक्ष की एकजुटता का उदाहरण देते हुए भाजपा को सीख लेने की नसीहत
पोस्ट में उल्लेख है कि:
- राणा सांगा जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्व पर अपशब्द कहने वाले रामजीलाल सुमन को विपक्षी नेता खुला समर्थन दे रहे हैं।
- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जिन पर ‘हत्या’ जैसे गंभीर आरोप लगे हैं, को भी पूरा विपक्ष एकजुट होकर समर्थन दे रहा है।
- एक जज के घर से करोड़ों रुपये बरामद होने के बावजूद विपक्ष की चुप्पी और आपसी एकता की मिसाल दी गई है।
“एक लकड़ी और लकड़ी का गट्ठर” वाली शिक्षा भाजपा पर भी लागू होनी चाहिए: पोस्ट का कटाक्ष
पोस्ट में भाजपा को यह सीख लेने की सलाह दी गई है कि “एकता की ताकत” की शिक्षा केवल जनता के लिए नहीं, बल्कि पार्टी नेतृत्व के लिए भी जरूरी है। अगर कार्यकर्ताओं, प्रवक्ताओं और सांसदों को समय पर साथ न दिया गया, तो जनसमर्थन और संगठनात्मक एकता पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।
“यह निजी विचार नहीं, दो लोकसभाओं की आवाज़ है”
पोस्ट में यह दावा किया गया है कि डॉ. निशिकांत दुबे और दिनेश शर्मा ने जो बातें कही हैं, वे व्यक्तिगत नहीं बल्कि उनके लोकसभा क्षेत्रों के लाखों नागरिकों की भावनाओं की अभिव्यक्ति हैं। देशभर से करोड़ों लोग इन विचारों से सहमत हैं।
सोशल मीडिया पर ट्रेंड हो रहे हैशटैग
— “Nishikant Dubey” – “We Support Nishikant Dubey” – We also enjoy freedom of expression इन हैशटैग्स के ज़रिए भाजपा समर्थक अपने गुस्से, असंतोष और समर्थन को सोशल मीडिया पर मुखरता से रख रहे हैं।
जय श्री राम के उद्घोष के साथ समाप्त हो रही यह पोस्ट, भाजपा नेतृत्व के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ मानी जा रही है। सोशल मीडिया पर गूंजती ये आवाज़ें सिर्फ वर्चुअल नहीं हैं, बल्कि ज़मीनी कार्यकर्ताओं की पीड़ा का प्रतिनिधित्व करती हैं।
NEWSANP के लिए आर पी सिंह की रिपोर्ट

