रांची(RANCHI): पेयजल व स्वच्छता विभाग के जल जीवन मिशन में हुए 23 करोड़ रुपए के फर्जीवाड़ा मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ा खुलासा किया है। ईडी की रिपोर्ट में कहा गया है कि विभाग में जो भी टेंडर होते थे, उन टेंडर वैल्यू का 10 फीसदी कमीशन लिया जाता था। कमीशन की राशि विभागीय मंत्री, सचिव, इंजीनियर और अन्य अधिकारियों के बीच बांटी जाती थी। रिपोर्ट के मुताबिक गिरफ्तार कैशियर संतोष कुमार ने जांच एजेंसी को यह जानकारी दी थी। संतोष को रांची पुलिस ने अप्रैल 2024 में गिरफ्तार किया था।
संतोष पर आरोप है कि उसने ठेका एजेंसी लार्सन एंड टूब्रो के नाम पर पेई आईडी बनाकर मार्च 2020 में जल जीवन मिशन के 2.71 करोड़ रुपए फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर कराया था। पुलिस ने उसके पास से 51 लाख रुपए बरामद भी किया था। इस मामले में सदर थाना, रांची में एफआईआर दर्ज हुई थी। इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने नई ईसीआईआर दर्ज की थी। इसके बाद 14 अक्टूबर 2024 को जांच एजेंसी ने रांची, जमशेदपुर और चाईबासा में 18 ठिकानों पर छापेमारी की थी। ये छापे तत्कालीन विभागीय मंत्री मिथिलेश ठाकुर के भाई विनय कुमार ठाकुर, पूर्व विभागीय सचिव मनीष रंजन, मंत्री के निजी सचिव हरेंद्र कुमार सहित अन्य के ठिकानों पर पड़े थे। इसके बाद जांच एजेंसी ने बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में संतोष कुमार से पूछताछ की थी। इसी पूछताछ में संतोष ने कमीशन बंटवारे की बात कही थी। कहा था कि वह इस सिंडिकेट में अहम भूमिका निभाता था।
14 अक्टूबर 2024 को ईडी ने 18 ठिकानों पर की थी रेड
संतोष ने कहा-तत्कालीन डीडीओ के कहने पर बनाई थी फर्जी आईडी
ईडी को जांच के दौरान संतोष ने बताया था कि एक बार तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सह डीडीओ प्रभात कुमार सिंह ने उसे अपने केबिन में बुलाया। उसके बैंक खाते की डिटेल्स मांगी। प्रभात ने कहा कि कुछ सरकारी राशि उसके खाते में ट्रांसफर की जाएगी। उसके बैंक खाते के नाम पर एक आईडी बनाई जाएगी और उसमें सरकारी राशि ट्रांसफर की जाएगी। फिर डीडीओ कोड (RNCWSS017) का उपयोग कर कुबेर वेबसाइट पर लार्सन एंड टूब्रो के नाम से नकली भुगतानकर्ता आईडी बनाई। अपने और कंपनी के बैंक खाते से उस आईडी को टैग कर दिया। इसके बाद कार्यलेखा और प्रबंधन सूचना प्रणाली पर बिल क्लर्क की आईडी व पासवर्ड का उपयोग कर रुपए की निकासी के लिए बिल बनाया।
फर्जीवाड़े के लिए संतोष ने बनाई थी रॉकड्रिल कंपनी
रिपोर्ट के मुताबिक संतोष ने दिसंबर 2022 में कार्यकारी अभियंता प्रभात कुमार के निर्देश पर रॉकड्रिल कंस्ट्रक्शन प्रा. लि. कंपनी बनाई थी। फर्जीवाड़े के लिए यह कंपनी बनाई गई थी। संतोष ने 22.93 करोड़ रुपए इस कंपनी और खुद के खाते में ट्रांसफर किया था। फिर संतोष ने 12 करोड़ की निकासी कर ली थी। ये पैसे जिन्हें बांटे गए, उनमें ईई प्रभात कुमार सिंह, राधेश्याम, चंद्रशेखर, एसई निरंजन कुमार, डिवीजनल अकाउंटेंट परमानंद कुमार, सुरेंद्र पाल मिंज (अब मृत), ट्रेजरी अफसर मनोज कुमार, सुनील कुमार सिन्हा, संजय कुमार सिंह, रंजन कुमार सिंह और संतोष कुमार शामिल हैं।
छापेमारी में ईडी को कई जगह मिले थे एफडी के कागजात
पिछले साल ईडी की छापेमारी में किसके यहां से क्या मिला था, रिपोर्ट में इसकी भी जानकारी दी गई है। बताया गया है कि रांची स्थित बंसल प्लाजा निवासी निरंजन कुमार के यहां से 3.03 लाख रुपए की एफडी, लेक एवेन्यू कांके रोड निवासी विभोर सिंघानिया के आवास से 47.50 लाख रुपए की एफडी, कुसुम विहार मोरहाबादी निवासी सुरेश कुमार महतो के आवास से 2.05 लाख रुपए की एफडी, रातू रोड निवासी निरंजन कुमार के आवास से 2.50 का एफडी और मनीष रंजन के यहां से कई कागजात व मोबाइल फोन जब्त किए गए थे।
NEWSANP के लिए रांची से ब्यूरो रिपोर्ट

