“व्यापारी असुरक्षित, संकट में फंसा उद्योग– कानून-व्यवस्था ध्वस्त”
“ राज्य में अपराधी बेलगाम, हत्या-डकैती बदस्तूर जारी, सरकार मौन पर उठाया सवाल?”
जामताड़ा(JAMTADA):झारखंड में भय और अपराध के माहौल पर फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (संथाल परगना प्रमंडल) के उपाध्यक्ष संजय अग्रवाल ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने एक सशक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी किया है। जिसमें राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
1. प्रेस विज्ञप्ति की मुख्य बातें:
- झारखंड में हर दूसरे-तीसरे दिन हो रही आपराधिक घटनाएं को चिंता का विषय बताया है।
. कहा है- छिनतई, डकैती और हत्याएं आम हो गई हैं। - राजधानी रांची में पिछले एक महीने में तीन व्यापारियों की हत्या।
- कल हुई व्यापारी की निर्मम हत्या ने झकझोर दिया है पूरा राज्य दहशत में है।
- व्यापारी वर्ग असुरक्षित महसूस कर रहा है। उद्योग जगत में असमंजस की स्थिति है।
- पुलिस तंत्र को उत्तरदायी बनाना और कड़ी कार्रवाई आवश्यक।
- मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी से अपील – ठोस कदम उठाएं।
2. “राज्य की राजधानी ही असुरक्षित है तो बाकी जगहों की हालत क्या होगी?”
संजय अग्रवाल ने बेहद तल्ख शब्दों में राज्य की राजधानी रांची की असुरक्षा को चिन्हित किया है।
उन्होंने कहा:
“राजधानी किसी राज्य की पहचान होती है, विकास का पैमाना होती है। यदि रांची में व्यापारी मारे जा रहे हैं, तो अन्य जिलों में भयावह स्थिति की कल्पना करना कठिन नहीं है।”
3. अपराधियों का बढ़ता मनोबल – प्रशासन मौन ?
- अपराधी दिनदहाड़े वारदात कर रहे हैं।
- घटनाओं के बाद गिरफ्तारी या ठोस कार्रवाई में सरकार की एजेंसियां फिसड्डी है।
- पुलिस की भूमिका पर लगातार प्रश्नचिन्ह।
- अपराधियों के हौसले बुलंद और पुलिस निष्क्रिय।
- जनता, व्यापारी, न्यायपालिका सभी में भय व्याप्त।
4. व्यापारी वर्ग में डर और व्यापार में गिरावट
अग्रवाल ने कहा कि इस भयावह माहौल का सीधा असर राज्य की आर्थिक सेहत पर पड़ रहा है।
“व्यापारी रीढ़ होते हैं। जब रीढ़ ही टूटने लगे तो राज्य खड़ा कैसे रहेगा?”
उन्होंने आगाह किया कि अगर यह हालात नहीं सुधरे तो निवेशक और व्यापारी झारखंड छोड़ने पर मजबूर हो जाएंगे।
5. व्यापारी हत्याओं की श्रृंखला – एक राज्य की शर्मनाक तस्वीर
रांची में बीते एक महीने में तीन व्यापारियों की हत्या:
- पहली हत्या: एक सर्राफा व्यापारी की दुकान में घुसकर हत्या।
- दूसरी हत्या: परिवहन व्यवसायी की गोली मारकर हत्या।
- तीसरी हत्या: कल ही एक और व्यापारी की निर्मम हत्या।
“इस तरह के घटनाक्रम राज्य की कानून व्यवस्था की पोल खोलते हैं,” – संजय अग्रवाल
6. पुलिस की जवाबदेही तय हो
अग्रवाल का स्पष्ट मत है कि पुलिस अधीक्षक और थानाध्यक्ष स्तर के अधिकारियों को प्रत्यक्ष जिम्मेदारी दी जाए।
उन्होंने कहा कि:
“अगर किसी जिले में अपराध होता है तो वहां के एसपी और थाना प्रभारी को सीधे उत्तरदायी ठहराया जाना चाहिए।”
7. चैंबर ऑफकॉमर्स की सामूहिक पहल की आवश्यकता
- सभी जिलों के चैंबर को साथ आना चाहिए।
- राज्य सरकार को सामूहिक रूप से ज्ञापन सौंपना चाहिए।
- व्यापारिक संगठनों को एक मंच पर लाकर समवेत आवाज़ उठानी चाहिए।
- अपराध को रोकना सिर्फ सरकार नहीं, समाज की भी जिम्मेदारी है।
8. मुख्यमंत्री से 7 अहम माँगें:
(1) राज्य स्तर पर “व्यापारी सुरक्षा आयोग” का गठन किया जाए।
(2) प्रत्येक जिले में “व्यापारी हेल्पलाइन” स्थापित की जाए।
(3) बाजारों में हाई-टेक सीसीटीवी निगरानी नेटवर्क हो।
(4) अपराधियों पर त्वरित कार्रवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना।
(5) हर बड़ी आपराधिक घटना पर 72 घंटे के भीतर चार्जशीट अनिवार्य।
(6) व्यापारिक संगठनों के साथ पुलिस की मासिक बैठक अनिवार्य।
(7) प्रत्येक थाने में व्यापारियों के लिए एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति।
9. झारखंड में निवेश और विकास को लग सकता है ग्रहण
अगर मौजूदा हालात नहीं सुधरे, तो राज्य को बड़े निवेशकों और उद्योगों से हाथ धोना पड़ सकता है।
संजय अग्रवाल ने आशंका जताई कि:
“हमारा झारखंड जो संभावनाओं का भंडार है, वह अपराध के साए में अपना भविष्य खो रहा है।”
10. “अब बहुत हुआ – सरकार को जगना होगा!”
संजय अग्रवाल ने राज्य सरकार को सख्त शब्दों में चेतावनी दी कि अब समय है कि प्रशासन अपनी जिम्मेदारी समझे।
उन्होंने कहा:
“हम किसी राजनीतिक द्वेष या आरोप-प्रत्यारोप के लिए नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य के लिए बोल रहे हैं।”
11. प्रेस को दिया गया संदेश – अपराध पर चुप्पी नहीं, अभियान चलाइए
उन्होंने प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से आग्रह किया कि वे इस गंभीर विषय को प्रमुखता से उठाएं और जन-जागरूकता के लिए अभियान चलाएं।
12. भविष्य की राह – एकजुटता, जिम्मेदारी और कार्रवाई
अंत में, संजय अग्रवाल ने दो टूक कहा:
“व्यापारी अब सिर्फ आर्थिक इकाई नहीं, राज्य की आत्मा हैं। अगर हम चुप रहे, तो कल और भी खतरनाक होगा। अपराध पर लगाम तभी लगेगी जब जनता, मीडिया और सरकार मिलकर प्रयास करें।”
निष्कर्ष
झारखंड के व्यापारी वर्ग की यह चिंता सिर्फ उनके समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे राज्य के आर्थिक और सामाजिक ढांचे का सवाल है।
संजय अग्रवाल की यह अपील, चेतावनी और मांगें प्रशासन और समाज दोनों के लिए चेतावनी की घंटी हैं।
अब देखना यह है कि राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन इस आगाज़ को समझते हैं या फिर हालात और भी बदतर होते हैं।
NEWSANP के लिए जामताड़ा से आर पी सिंह की रिपोर्ट

