‘राष्ट्रपति केवल नाममात्र का मुखिया’, उप राष्ट्रपति धनखड़ के बयान पर कपिल सिब्बल ने दी प्रतिक्रिया…

‘राष्ट्रपति केवल नाममात्र का मुखिया’, उप राष्ट्रपति धनखड़ के बयान पर कपिल सिब्बल ने दी प्रतिक्रिया…

वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. सिब्बल ने कहा कि भारत में राष्ट्रपति केवल नाममात्र का प्रधान होता है. उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट को अनुच्छेद 142 की शक्ति संविधान ने दी है.

नई दिल्ली(NEW DELHI):उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के एक बयान पर वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने प्रतिक्रिया दी है. कपिल सिब्बल ने कहा कि भारत का राष्ट्रपति संवैधानिक हेड है. उपराष्ट्रपति का भी पद ऐसा ही है. उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 142 में संविधान ने सुप्रीम कोर्ट को शक्ति दी है. सिब्बल ने कहा कि उपराष्ट्रपति धनखड़ की बात सुनकर हैरान हूं, काफी दुख भी पहुंचा है. उन्हें किसी पार्टी की तरफदारी करने वाली बात नहीं करनी चाहिए. बीते दिन उपराष्ट्रपति ने कहा था, “अनुच्छेद 142 लोकतांत्रिक ताकतों के खिलाफ एक परमाणु मिसाइल बन गया है और कोर्ट के लिए चौबीसों घंटे उपलब्ध है.”

धनखड़ की टिप्पणियों की सिब्बल ने की आलोचना
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की ओर से न्यायपालिका को लेकर की गई टिप्पणियों की आलोचना करते हुए राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने कहा कि यह असंवैधानिक है. राज्यसभा के किसी सभापति को कभी भी इस तरह का राजनीतिक बयान देते नहीं देखा गया था. सिब्बल ने यह भी कहा कि लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच समान दूरी बनाए रखते हैं और वे पार्टी प्रवक्ता नहीं हो सकते. सिब्बल ने मीडिया से बात करते हुए कहा ‘‘हर कोई जानता है कि लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी बीच में होती है. वह सदन के अध्यक्ष होते हैं, किसी एक पार्टी के अध्यक्ष नहीं. वे भी वोट नहीं करते हैं, वे केवल तब वोट करते हैं जब बराबरी होती है. उच्च सदन के साथ भी यही बात है. आप विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच समान दूरी पर हैं.’’

सिब्बल ने उप राष्ट्रपति के बयान पर प्रतिक्रिया
कपिल सिब्बल ने उप राष्ट्रपति के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा “जगदीप धनखड़ का बयान देखकर मुझे दुख और आश्चर्य हुआ. आज के समय में अगर किसी संस्था पर पूरे देश में भरोसा किया जाता है, तो वह न्यायपालिका है. जब सरकार के कुछ लोगों को न्यायपालिका के फैसले पसंद नहीं आते, तो वे उस पर अपनी सीमाएं लांघने का आरोप लगाने लगते हैं. क्या उन्हें पता है कि संविधान ने अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट को पूर्ण न्याय देने का अधिकार दिया है? राष्ट्रपति केवल नाममात्र का मुखिया होता है. राष्ट्रपति कैबिनेट के अधिकार और सलाह पर काम करता है. राष्ट्रपति के पास अपना कोई व्यक्तिगत अधिकार नहीं होता. जगदीप धनखड़ को यह बात पता होनी चाहिए.”

NEWSANP के लिए नई दिल्ली से ब्यूरोरिपोर्टpolio

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