मिहिजाम में पत्रकार के घर मिला नाग, विशेषज्ञ ने सुरक्षित पकड़ा..

जामताड़ा(JAMTADA):झारखंड के मिहिजाम क्षेत्र में एक पत्रकार के आवास पर नाग प्रजाति का सांप दिखाई दिया। जैसे ही इसकी सूचना मिली, वन विभाग के एक विशेषज्ञ ने मौके पर पहुँचकर उसे सावधानीपूर्वक पकड़ा। सांप को बिना किसी नुकसान के जंगल में छोड़ दिया गया। यह कार्य एक उदाहरण है कि कैसे हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर रहना चाहिए।
2. सांप की लंबाई और वजन: बड़ी प्रजाति का संकेत
पकड़ा गया नाग करीब 4.5 फीट लंबा और 5.4 किलोग्राम वजनी था। इतनी लंबाई और वजन इस बात का संकेत है कि यह एक परिपक्व और शक्तिशाली सांप था। विशेषज्ञों के अनुसार, यह नाग प्रजाति के गेंहुअन सांपों में से एक था, जो आमतौर पर विषैला माना जाता है। इसका सही समय पर पकड़ा जाना राहत की बात रही।
3. गर्मी बढ़ते ही सुरक्षित जगह से निकलने लगे हैं सांप
जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, वैसे-वैसे सांप अपनी सुरक्षित जगहों से बाहर निकलने लगे हैं। अक्सर ये सांप ठंडी और अंधेरी जगहों में रहते हैं, लेकिन गर्मी में पानी और ठंडी जगह की तलाश में यह आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे समय में लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
4. सांपों को सुरक्षित स्थान पर छोड़ना हम सभी की जिम्मेदारी
सांप हमारे पारिस्थितिक तंत्र का अहम हिस्सा हैं। अगर यह आबादी वाले इलाके में आ जाएं, तो इन्हें मारने की बजाय विशेषज्ञों को बुलाना चाहिए ताकि उन्हें सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा जा सके। यह कार्य केवल वन विभाग की नहीं, बल्कि समाज के हर जिम्मेदार नागरिक की भी है।
5. गर्मियों में सावधानी रखें, डरें नहीं
गर्मी के मौसम में सांपों की गतिविधि बढ़ जाती है। ऐसे में लोगों को डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि सावधानी बरतने की आवश्यकता है। खुले स्थानों पर चलते समय सतर्क रहें, झाड़ियों या अंधेरी जगहों में हाथ न डालें। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए।
6. सांपों की उपस्थिति के लाभ
सांप प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद जरूरी होते हैं। ये खेतों और घरों के आस-पास कीटों और चूहों की संख्या को नियंत्रित करते हैं। इससे फसल की सुरक्षा होती है और बीमारियों के फैलाव पर भी अंकुश लगता है। इसलिए सांपों की उपस्थिति को नकारात्मक रूप में नहीं देखना चाहिए।
7. सांपों से संभावित नुकसान
हालाँकि सांप पारिस्थितिक दृष्टि से लाभकारी होते हैं, लेकिन अगर यह आबादी वाले क्षेत्रों में आ जाएं, तो खतरा उत्पन्न कर सकते हैं। विषैले सांपों के काटने से जान का खतरा होता है। इसके अलावा सांपों का डर लोगों को मानसिक रूप से परेशान कर सकता है, जिससे अफरातफरी मच सकती है।
8. नाग (गेंहुअन) प्रजाति कितनी खतरनाक होती है
गेंहुअन प्रजाति का सांप अत्यधिक विषैला होता है। इसके काटने से तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव पड़ता है और समय पर इलाज न मिले तो जान भी जा सकती है। हालांकि, यह सांप बिना छेड़े हमला नहीं करता। अगर इसे शांतिपूर्वक हटाया जाए, तो कोई नुकसान नहीं होता।
9. जामताड़ा और आसपास के क्षेत्रों में नागों की जनसंख्या
झारखंड के जामताड़ा और उसके आस-पास के क्षेत्रों में नाग प्रजाति के सांपों की संख्या अच्छी खासी है। यहां की जलवायु और प्राकृतिक वातावरण इनके लिए अनुकूल है। खेतों, जंगलों और झाड़ियों में ये प्रजाति प्रायः देखी जाती है। इनके संरक्षण और निगरानी की आवश्यकता है।
10. नागों की वंश वृद्धि की स्थिति
गेंहुअन सांपों की वंश वृद्धि मानसून के समय अधिक होती है। एक बार में यह कई अंडे देते हैं, जो उपयुक्त पर्यावरण में आसानी से बढ़ते हैं। मानव हस्तक्षेप और आवास नष्ट होने से इनकी संख्या पर असर पड़ता है। संरक्षण के प्रयासों से इनकी संख्या स्थिर रखी जा सकती है।
11. वन विभाग की जिम्मेदारी
वन विभाग की यह जिम्मेदारी है कि वह सांपों जैसे जीवों की सुरक्षा करे और लोगों को जागरूक बनाए। किसी आपात स्थिति में तुरंत रेस्क्यू टीम भेजी जाए। साथ ही, लोगों को प्रशिक्षित भी किया जाए कि अगर सांप मिल जाए तो क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
12. जामताड़ा वन प्रमंडल के कार्य
जामताड़ा वन प्रमंडल इस दिशा में सक्रियता से कार्य कर रहा है। विशेषज्ञों की टीम बनाकर सांपों को सुरक्षित पकड़ने और जंगल में छोड़ने का कार्य किया जा रहा है। साथ ही, जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि लोग सांपों से डरें नहीं, बल्कि समझदारी से निपटें।
NEWSANP के लिए जामताड़ा से आर पी सिंह की रिपोर्ट

