रामनवमी पर बन रहे है बेहद खास संयोग वर्षों बाद भी नही मिलेंगे अद्भुत शुभ योग करे अपनी मनोकामनाएं पूरी…

रामनवमी पर बन रहे है बेहद खास संयोग   वर्षों बाद भी नही मिलेंगे अद्भुत शुभ योग करे अपनी मनोकामनाएं पूरी…

रवि पुष्य सुकर्मा और ध्वज योगः के संयोग से बन रहा है सर्वार्थअमृत सिद्धि योग

गोश्वामी तुलसीदास के अनुसार मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम सीता लक्ष्मण और हनुमंत लला के पूजा अर्चन से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है ,कहा गया है श्री राम का नाम लेने से बिगड़े काम बनते है माता सीता के नाम से विपत्तियों का नाश होता है और हनुमान के नाम से सारे बिघ्न टल जाते है.

रामनवमी का त्योहार हर नव वर्ष( बिक्रम संबत )में बासंतिक नवरात्रि के दौरान चैत्र मास शुक्ल पक्ष नवमी तिथि,पुनर्वसु नक्षत्र कर्क लग्न और मध्याह्न के समय भगवान विष्णु के सांतवे अवतार श्री रामजी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है इस दिन सभी भक्त गन पूजार्चन कर अपने अपने घरों में श्रीराम सपरिवार का पताका फहराते है इस वर्ष रामनवमी का पर्व 6 अप्रैल रविवार 2025 को पड़ रहा है.

रवि पुष्य सर्वार्थमृतसिद्धि योग पड़ने से बनेंगे भक्तों के बिगड़े काम
6 अप्रैल रविवार को प्रातः 9 बजके 42 मिनट तक पुनर्वसु और उसके बाद पुष्य नक्षत्र पड़ रहा है रविवार दिन सुकर्मा योग तथा ध्वज योगः के कारण इस दिन रविपुष्य अमृतसिद्धियोग तथा अजिजय योग का संयोग बन रहा है जो भक्तों के लिए अत्यंत शुभ फलदायी संकेत है जो भी भक्त निश्छल मन से भगवान की भक्ति करेंगे बनेंगे उनके बिगड़े काम.

शिवधिवास योग पड़ने से भक्तों के रोग और शोक होंगे दूर
इस रविवार शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि है जिसकारण शिवधिवास का भी योग बन रहा है अतः इस दिन मैया पार्वती और भगवान भोलेनाथ भी पृथ्बी पर भ्रमण करेंगे जिस कारण भक्तों के रोग और शोक से मुक्ति मिलेगी
पूजन का शुभ मुहूर्त

(1) esनवमी तिथि शनिवार रात्रि 12 बजके 5 मिनट से रविवार रात्रि 11 बजके 15 मिनट रहेगी अतः रविवार दिन भर पूजा का शुभ मुहूर्त है

(2) पुनर्वसु नक्षत्र शनिवार प्रातः 10 बजके 7 मिनट से रविवार प्रातः 9 बजके 42 मिनट तक है अतःपूजन हेतु रविवार प्रातःकाल से 9 बजके 42 मिनट तक अती शुभ मुहूर्त है

(3) कर्क लग्न रविवार दिन 11 बजके 58 मिनट से 2 बजके 16 मिनट तक रहता है अतः रविवार को इस समय पूजन करना सर्वार्थमृतसिद्धि मुहूर्त होगा

पूजन कैसे करे
प्रातः काल स्नान ध्यान से निव्रित होकर श्री राम सपरिवार की तस्बीर सामने रख धूप दीप प्रसादी अर्पण करें फिर पताका (ध्वजा) फहराए और श्री रामनवमी ब्रत की कथा श्रवण करे यह संभव न हो तो 107 या 7 बार पुरुशुक्त या श्री राम जन्म स्तुति का पाठ ,करे आपकी समस्त मनोकामनाएं प्रभु अवस्य पूरा करेंगे । यह सब संभव न हो तो कम से कम हनुमान चालिसा का भी पाठ कर सकते है

NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

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