
झरिया(JHARIA): चार दिवसीय चैती महापर्व छठ के तीसरा दिन गुरुवार को शाम छठ व्रतियों ने नदी एवं तालाब पर आस्था चल गामी भगवान सूर्य को प्रथम अर्घ्य प्रदान किया।
झरिया स्थित सिंह नगर एवं आनंद भवन तालाब था दामोदर नदी के दोनों किनारो पर भगवान भुवन भास्कर की पूजा अर्चना की गई।
छठ व्रत के मध्य नजर सभी तालाबों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम प्रशासन की ओर से किए गए थे विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा व्रतियों के बीच फल फूल दूध एवं पूजन सामग्रियों की वितरण की गई।
शुक्रवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य
शुक्रवार 4अप्रैल को उदीयमान सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जायेगा. इस दिन सूर्योदय 05 बजकर 38 मिनट पर होगा. इसके बाद व्रती के पारण के साथ चार दिवसीय महापर्व छठ का समापन होगा.
तांबे के लोटे में दूध व गंगा जल मिलाकर सूर्य देवता को दें अर्घ्य
पहले अर्घ्य के दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. व्रती दिन भर निर्जला व्रत रखते हैं और शाम में किसी तालाब, नदी या जलकुंभ में जाकर सूर्य की उपासना करते हैं. इसके बाद डूबते हुए सूर्य को दूध और पानी से अर्घ्य देते हैं.
शास्त्रों के अनुसार, तांबे के लोटे में दूध और गंगा जल मिलाकर सूर्य देवता को अर्घ्य देना चाहिए.
गौरतलब हो कि अस्ताचलगामी यानी डूबते सूर्य की उपासना केवल छठ पूजा में ही होती है. ऐसा माना जाता है कि इस समय सूर्य अपनी दूसरी पत्नी प्रत्यूषा के साथ रहते हैं. इसीलिए प्रत्यूषा को अर्घ्य दिया जाता है.
शाम के समय सूर्य की आराधना से जीवन में संपन्नता आती है. अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देने से हर तरह की परेशानी दूर होती है। पूजा के दौरान कई संस्थाओं ने छठ व्रतियों के बीच फल फूल दूध आदि का वितरण कर पुण्य के भागी बनने का काम किया। जबकि छठ पूजा को शांति पूर्ण तरीके से सम्पन्न कराने के लिए झरिया अंचलाधिकारी के साथ झरिया इंस्पेक्टर शशिरंजन कुमार अपने सदलबल छठ घाटों के मुनिटरिंग करते हुए दिखाई दिए इसके अलावा बड़ी संख्या में झरिया शांति समिति के सदस्यों व समाजसेवियों ने भी अपनी भागीदारी निभाने का काम किया।

NEWSANP के लिए झरिया से अरविंद सिंह बुंदेला की रिपोर्ट

