गुड़ी पड़वा क्यों मनाया जाता है? जानें इतिहास और महत्व…

गुड़ी पड़वा क्यों मनाया जाता है? जानें इतिहास और महत्व…

धनबाद(DHANBAD) : गुड़ी पड़वा भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण पर्व में से एक है. वैसे तो यह पर्व पूरे देश में मनाया जाता है. विशेष रूप से यह महाराष्ट्र और कोणक क्षेत्र में हर्षोउल्लाश के साथ मनाया जाता है, लेकिन यह पर्व क्यों मनाया जाता है? आइए जानते हैं. पंचांग के अनुसार, गुड़ी पड़वा चैत्र माह शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है. इसे हिंदू नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. खास तौर पर यह महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, और आंध्र प्रदेश में बड़े ही हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है. इस बार यह पर्व 30 मार्च को रविवार को मनाया जाएगा. इस साल इसी दिन चैत्र नवरात्रि की शुरुआत भी होगी, इसलिए यह दिन और भी शुभ माना जा रहा है. गुड़ी पड़वा के दिन घरों में गुड़ी फहराने के परंपरा है. मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है, लेकिन इस पर्व की शुरुआत कैसे हुई, आखिर क्या है इसके पीछे की कहानी?

गुड़ी पड़वा क्यों मनाते हैं?
गुड़ी पड़वा से जुड़ी एक कथा रामयण काल से जुड़ी हुई है. उस पौराणिक कथा के अनुसार, त्रेतायुग में किष्किंधा नाम के राज्य में बाली नामक राजा का शासन था, जो कि अपने भाई सुग्रीव को परेशान करता था . जब भगवान राम 14 वर्षों के वनवास के वनवास पर गए, उस दौरान रावण ने माता सीता का हरण कर लिया था. भगवान राम जब माता सीता की खोज कर रहे थे, तब उनकी मुलाकात सुग्रीव से हुई. श्रीराम से मिलने के बाद सुग्रीव ने उन्हें अपने कष्ट बताए और मदद मांगी.
सुग्रीव की सहायता करने के लिए भगवान राम ने बाली का वध किया और सुग्रीव को न्याय और उसका खोया हुआ राज्य वापस दिलाया. कहते हैं यह घटना चैत्र मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को हुई थी, इसलिए यह दिन विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है. एक अन्य कथा के अनुसार, इस दिन ब्रह्मा जी ने ब्रह्मांड का निर्माण किया था, इसलिए इस दिन से ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है. वहीं महाराष्ट्र में इसे मनाने का कारण मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज की युद्ध में विजय से है.

गुड़ी पड़वा का महत्व
महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा के त्योहार को हिंदू नववर्ष के शुभारंभ और विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. इस दिन मराठी समुदाय के लोग बांस की लकड़ी को लेकर उसके ऊपर चांदी, तांबे या पीतल के कलश का उल्टा रखते हैं. इसमें केसरिया रंग का पताका लगाकर उसे नीम की पत्तियां , आम की पत्तियां और फूलों से सजाया जाता है फिर घर के सबसे ऊंचे स्थान पर लगाया जाता है.

NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

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