मिहिजाम में भक्ति और उल्लास से निकली दिव्य शोभायात्रा
जामताड़ा(JAMTADA):भारत का हिन्दू नववर्ष एक पावन पर्व है, जिसे पूरे देश में आस्था, उल्लास और भक्ति के साथ मनाया जाता है। विक्रम संवत 2082 के आगमन पर मिहिजाम में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसने पूरे नगर को धार्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता से भर दिया। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और पूरे नगर में हर्षोल्लास का माहौल व्याप्त हो गया।
शोभायात्रा का शुभारंभ: हिलरोड मिहिजाम से प्रारंभ हुआ धार्मिक आयोजन
शोभायात्रा का शुभारंभ मिहिजाम हिलरोड से किया गया। भक्तों की विशाल भीड़ में हर उम्र के महिला, पुरुष, युवा, बच्चे और वृद्धजन शामिल थे, जो सभी केसरिया वस्त्र धारण किए हुए थे। पूरे वातावरण में भगवा रंग की छटा बिखरी हुई थी, जो सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक थी।
भक्तों के उत्साह का कोई ठिकाना नहीं था। शंखनाद, डमरू और घंटियों की ध्वनि के साथ यात्रा आरंभ हुई। भगवान श्रीराम, माता जानकी, भगवान शिव, हनुमान जी और अन्य देवी-देवताओं की झांकियां आकर्षण का केंद्र बनीं।
भक्ति संगीत से गुंजायमान हुआ वातावरण
शोभायात्रा में बजरंगी झंडों से सजे एक विशेष वाहन पर भक्ति संगीत की आलौकिक धुनें बज रही थीं। श्रद्धालु श्रीराम और माता जानकी के भजनों पर नृत्य और जयघोष कर रहे थे।
“जय श्रीराम” और “हर हर महादेव” के उद्घोषों से पूरा वातावरण गूंजायमान था।
“श्रीरामचंद्र कृपालु भज मन, हरण भव भय दारुणं” जैसे मधुर भजनों ने श्रद्धालुओं के हृदयों को भक्तिमय आनंद से भर दिया।
शोभायात्रा का मार्ग: नगर के प्रमुख स्थलों से होकर गुजरी यात्रा
यह शोभायात्रा मिहिजाम के हिलरोड से प्रारंभ होकर बेसिक स्कूल पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने हवन-पूजन और आरती की।
इसके बाद यह मेन रोड होते हुए स्टेशन चौक की ओर अग्रसर हुई। इस दौरान रास्ते के दोनों ओर श्रद्धालु आरती और पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत कर रहे थे।
अंततः यह भव्य यात्रा एक नंबर गेट पहुंची, जहां श्रद्धालुओं की अपार भीड़ ने इसे एक ऐतिहासिक आयोजन बना दिया।
धार्मिक और सांस्कृतिक संदेश: सनातन परंपरा का गौरवशाली उत्सव
इस अद्भुत शोभायात्रा ने धार्मिक आस्था, भक्ति और सौहार्द्र का संदेश दिया।
यह आयोजन सनातन संस्कृति की जड़ों को मजबूत करने के लिए प्रेरणा बना।
शोभायात्रा के माध्यम से समाज को एकता, भाईचारे और धार्मिक सद्भाव का संदेश मिला।
समापन में समारोह: दिव्य आरती और प्रसाद वितरण
शोभायात्रा का समापन एक नंबर गेट पर हुआ, जहां विशाल आरती का आयोजन किया गया।
भक्तों के लिए भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
इस आयोजन ने समाज में भक्ति, आस्था और संस्कारों की मशाल जलाए रखने का संकल्प दोहराया।
निष्कर्ष: भक्ति और श्रद्धा का अनुपम संगम
हिन्दू नववर्ष विक्रम संवत 2082 के अवसर पर मिहिजाम में निकली शोभायात्रा ने पूरे नगर को धर्ममय वातावरण से भर दिया।
इस आयोजन ने यह प्रमाणित किया कि सनातन संस्कृति की जड़ें अटूट और सशक्त हैं।
इस तरह की यात्राएं न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करती हैं बल्कि समाज में एकता और भाईचारे को भी बढ़ावा देती हैं।
NEWSANP के लिए जामताडा से आर पी सिंह की रिपोर्ट

