रांची(RANCHI): हाईकोर्ट ने खनन कंपनियों की रॉयल्टी से जुड़े मामले में गुरुवार को फैसला सुनाया। चीफ जस्टिस रामचंद्र राव व जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने हिंडाल्को, सेल सहित अन्य 21 याचिकाओं पर सुनवाई के बाद खनन कंपनियों को बड़ी राहत दी।
कोर्ट ने जिला खनन पदाधिकारी (डीएमओ) के अधिकार क्षेत्र का निर्धारण करते हुए खनन कंपनियों को डिमांड के लिए जारी नोटिस को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि माइंस एंड मिनरल्स एक्ट की धारा 21 (5) में रॉयल्टी के लिए डिमांड नोटिस जारी करना डीएमओ के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। इसके बाद कोर्ट ने कंपनियों द्वारा जमा की गई राशि सालाना सात फीसदी ब्याज के साथ आठ सप्ताह में लौटाने का आदेश दिया। हालांकि कोर्ट ने कहा कि वह सक्षम प्राधिकार के जरिए कंपनियों को डिमांड नोटिस जारी कर सकता है।
इससे पहले सुनवाई में सरकार की ओर से कहा गया था कि सरकार डिमांड नोटिस जारी करने के लिए डीएमओ सहित किसी को भी अधिकार दे सकती है। इस संबंध में 2005 में जारी अधिसूचना भी कोर्ट में पेश की गई थी। जबकि प्रार्थियों की ओर से एडवोकेट इंद्रजीत सिन्हा का कहना था कि अधिसूचना के मुताबिक डीएमओ को सिर्फ रॉयल्टी के आकलन का अधिकार है। लेकिन उन्होंने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर डिमांड नोटिस जारी किया।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

