बिहार(BIHAR):शहर के एमजेके कॉलेज की पूर्व प्राध्यापिका और वर्तमान में आरडीएस कॉलेज की दर्शनशास्त्र िवभागाध्यक्ष डॉ. अनुराधा पाठक की सोच है कि जिंदगी लंबी नहीं, बड़ी होनी चाहिए। इसी सोच के तहत उन्होंने समाज में एक बड़ी मिसाल पेश की है। उन्होंने शादी नहीं करने का संकल्प के साथ ही अपने सभी अंगों को जरूरतमंदों के लिए दान करने का प्रण लिया है। अनुराधा बताती हैं कि उन्हें यह प्रेरणा बड़ी बहन माया तिवारी से मिली। बहन की आंखें बहुत सुंदर थीं। उसे दान करना चाहती थी। तब अनुराधा 10वीं की छात्रा थी। बहन की बातें समझ नहीं आई। लेकिन बाद में जब समझा तो बहन की बातों को आत्मसात करते हुए अनुराधा ने भी हृदय, लंग्स, किडनी, लीवर, आंखों सहित सभी उपयोगी अंगों को मृत्यु के बाद दान करने का निर्णय लिया। इसके लिए एम्स दिल्ली में अपने दो शोध सहयोगियों के साथ पंजीकरण भी कराया है। कार्ड में स्पष्ट लिखा है कि निधन के बाद उनके अंग जरूरतमंदों को दिए जाएं। इसके अलावा, उन्होंने अपने मृत शरीर को मेडिकल साइंस के छात्रों की शिक्षा के लिए दान करने का भी फैसला किया है। अनुराधा का कहना है कि इससे आत्मा को शांति मिलेगी।
जीवन शोध और उपलब्धियों से भरा है वर्तमान में आरडीएस कॉलेज के दर्शनशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष सह सहायक आचार्य अनुराधा के नाम 30 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। 30 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में भाग ले चुकी हैं। उनके शोध का विषय ‘अद्वैत वेदांत में सुषुप्ति’ और ‘भारतीय दर्शन में स्वप्न’ रहा है। दो बार सर्वश्रेष्ठ शोध-पत्र का पुरस्कार मिल चुका है। 2017 में ‘वैदिक साहित्य में स्वप्न अवस्था’ के लिए विजयश्री युवा स्मृति सम्मान मिला। 2024 में ‘भारतीय संस्कृति में परिवार की महत्ता’ विषय पर श्रीमती किरण देवी खाटेड सम्मान, लाडनूं, राजस्थान से नवाजा गया। एमजेके कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की कार्यक्रम पदाधिकारी के रूप में चार साल तक कार्य किया।
NEWSANP के लिए बिहार से ब्यूरो रिपोर्ट

