कर्नाटक(KARNATAKA) : आर्थिक तंगी के कारण 57 वर्षीय गौरी महाकुंभ नहीं जा सकीं, तो उन्होंने अपने आंगन में 40 फीट गहरा कुआं खोद डाला, इसे अपनी ‘गंगा’ मान लिया। रोज़ 6-8 घंटे मेहनत कर उन्होंने दो महीने में इसे पूरा किया। प्रशासन ने रोका, लेकिन हौसले से जीती बाज़ी। उनका संकल्प आत्मनिर्भरता की मिसाल है।
57 साल की बुजुर्ग महिला ने धरती चीरकर बहा दी आस्था की धारा, घर पर ऐसे आईं गंगा मैय्या। पैसों की तंगी बनी बाधा, लेकिन हौसले से जीती बाजी
सच्ची आस्था और दृढ निश्चय इंसानों के असंभव काम को भी संभव बना देने की ताकत देती हैं। कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के सिरसी की 57 वर्षीय गौरी ने ऐसा ही कुछ कर दिखाया। आर्थिक तंगी के चलते जब वह प्रयागराज में होनेवाले महाकुंभ में स्नान के लिए नहीं जा सकीं, तो उन्होंने हार मानने की बजाय अपनी श्रद्धा को एक नया रूप दे दिया।उन्होंने अपने ही घर के आंगन में 40 फीट गहरा कुआं खोद डाला। उनके लिए यह सिर्फ एक कुआं नहीं था, बल्कि उनकी अटूट आस्था का प्रतीक था।
गौरी का कहना है, “अगर मैं गंगा तक नहीं जा सकती, तो मैंने गंगा को अपने घर बुला लिया।” उनकी यह कहानी साबित करती है कि जब इरादे मजबूत हों, तो कोई भी बाधा अपने लक्ष्य तक पहुंचने से नहीं रोक सकती।
NEWSANP के लिए कर्नाटक से ब्यूरो रिपोर्ट

