बोकारो(BERMO): रोजी रोटी को लेकर पलायन राज्य के कई इलाको से कहीं न कहीं आज भी जारी है. इसके पीछे वजह तमाम जरूरते है जो इस बाजारवाद के ज़माने में बिना कमाए मुमकिन नहीं है. लेकिन कोई भी इंसान परदेस में पेट की खातिर जद्दोजहद और कड़ा संघर्ष तो करता ही, लेकिन तब एक अदद रोजगार आफत बन आती है. जब किसी की अकाल मौत हो जाती हो . ऐसा ही कुछ हुआ बेरमो के करगली बाजार निवासी कृष्णा करमाली के साथ जो रोजगार के जरिए पैसा तो नहीं कमा सका. लेकिन हाँ अपनी जिंदगी जरूर गवा दी और भरापूरा परिवार को बेसहारा छोड़ दिया.
31 साल के कृष्णा करमाली 12 फरवरी को अपने चार दोस्तों के साथ रोजगार की खातिर जम्मू -कश्मीर के कटरा गए थे.18 तारीख की रात अपनी पत्नी से बात भी की थी. लेकिन 19 फरवरी से उनका मोबाइल बंद बताने लगा. बाद में पता चला की उनकी मौत हो गई. आखिर उनकी मृत्यु कैसे हुई?, क्या कारण थे?, कौन सी मुसीबत ऐसी आ गई या फिर किसी ने उनकी हत्या कर दी?. अभी तक कुछ भी मालूम नहीं पड़ा है. बताया जाता है कि जम्मू कश्मीर के ठेकेदार इम्तियाज़ आंसरी के संपर्क में आने के बाद कृष्णा के साथ चार युवक गए थे. घर में कृष्णा करमाली के परिजनों का रो -रोकर बुरा हाल है. कृष्णा अपने पीछे अपनी पत्नी और दो बच्चों को छोड़कर चले गए.परिजनों ने कृष्णा के शव को मांगने की गुहार प्रशासन से की है.
पूर्व पार्षद और बीजेपी नेत्री अर्चना सिंह ने भी इसपर चिंता जताई और अपनी तरफ से कृष्णा के परिजनों की मदद के लिए और उसके शव को वापस लाने के लिए अधिकारियो से बात भी की. इसके साथ ही उन्होंने पलायन और रोजगार का मसला भी शिद्दत से उठाया. उनका कहना साफ था कि आप सोचिये रोजगार के चलते एक परिवार उजड़ गया. अगर नौकरी या कमाने के कोई और साधन यहां होते तो वह युवक बाहर क्यों जाता?. बेरमो में ही अगर काम धंधा मिलता तो पलायन का दर्द नहीं झेलना पड़ता?. ये एक गंभीर विषय है, जिसे सोचने की सख्त जरुरत है.
सवाल तो बड़ा यही है कि जल, जंगल और जमीन के प्रदेश झारखण्ड को कुदरत ने खनिज -सम्पदा से भरा -पूरा बनाया है, लेकिन इसके वजूद के दो दशक से ज्यादा बीत जाने के बावजूद रोजगार पाना आज भी एक चुनौती हैं और लोग दूसरे राज्यों में काम के लिए पलायन कर रहे हैं.यह सिलसिला आज भी जारी है.
NEWSANP के लिए बोकारो से शिवपूजन सिंह की रिपोर्ट

