झारखंड(JHARKHAND): केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने झारखंड सरकार से श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन (एसपीएमआरएम) में खर्च की गई राशि और बची हुई राशि का ब्योरा मांगा है। मंत्रालय के अपर महानिदेशक महेंद्र कुमार उज्जैनिया ने इस संबंध में झारखंड के मुख्य सचिव को पत्र लिखा है।
पत्र में कहा गया है कि राज्य सरकार ने इस योजना के तहत जो राशि खर्च की है, उसका उपयोगिता प्रमाण पत्र दे। इसके अलावा योजना की बची राशि डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से वापस करे। मंत्रालय ने मुख्य सचिव के साथ ही राज्य के ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव को भी इस पत्र की प्रति भेजी है।
मंत्रालय ने कहा है कि रूर्बन मिशन को बंद कर दिया गया है। इसलिए तय प्रारूप में उपयोग की गई राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र भेजें। साथ ही 25 फरवरी तक शेष राशि जमा कराएं।
31 मार्च 2022 को बंद हो गई है योजना
केंद्र सरकार ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन को 31 मार्च 2022 को बंद कर दिया था। इसके बाद केंद्रीय ग्रामीण विकास विभाग (डीआरडीओ) ने 23 मार्च 2023 को राज्य को पत्र भेजकर संबंधित क्लस्टर के पूरा होने की समय-सीमा बताई थी। इसमें झारखंड को दिसंबर 2023 तक 15 क्लस्टर को पूरा करना था। लेकिन तय अवधि में झारखंड में सिर्फ छह क्लस्टर का काम ही पूरा हो पाया।
इस मिशन के अनुसार रूर्बन क्लस्टर (ग्रामीण-शहरी) भौगोलिक दृष्टि से निकटवर्ती गांवों का एक समूह है। एक रूर्बन क्लस्टर में मैदानी व तटीय क्षेत्रों में 25 से 50 हजार की आबाजी वाले रेगिस्तानी व पहाड़ी और आदिवासी क्षेत्रों में 5 से 15 हजार की आबादी वाले गांव शामिल हैं।यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों को सामाजिक, आर्थिक रूप से मजबूत क्षेत्र बनाने का एक प्रयास है। यह मिशन आर्थिक, सामाजिक और बुनियादी ढांचा सुविधाएं प्रदान करके ग्रामीण क्षेत्रों को मजबूत बनाने का प्रयास करता है, जिससे संतुलित क्षेत्रीय विकास हो सके।
NEWSANP के लिए झारखंड से ब्यूरो रिपोर्ट

