जिला भर में बालू का चल रहा हैं खेल सरकारी खुफिया तंत्र भी फेल…

जिला भर में बालू का चल रहा हैं खेल सरकारी खुफिया तंत्र भी फेल…

धनबाद(DHANBAD): झारखंड में खनिज सम्प्रदा की अकूत भण्डार है जिसे बचाने की जिम्मा सरकारी बाबुओं पर हैं मगर पुरे झारखण्ड में खनिज सम्प्रदा को लुटा जा रहा हैं,क्या गांव क्या शहर हर तरफ लूट मची हुई हैं,हम ऐसा इसलिए लिए कह पा रहे हैं कि हमारे संवाददाता जिले भर से ग्राउंड रिपोर्टिंग कर जो दस्तावेज उपलब्ध किए हैं उससे साफ जाहिर होता हैं कि किस तरह से बालू का खेल पुरे जिला भर जारी हैं पेश हैं एक रिपोर्ट…

NGT हटने के बाद ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को नदी घाटों से बालू उठाव को लेकर दो केटेगरी में बाटा गया हैं एक वह हैं जो कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय मुखिया के देख रेख में बालू का उठाव सरकारी रॉयल्टी प्रति सौ सेप्टिक एक सौ रूपये सरकारी चालान के साथ उठाने की अनुमती दी गई हैं लेकिन नदी घाटों पर तो मुखिया द्वारा सौ रूपये की चालान तो दी जा रही हैं लेकिन उसके बदले में बालू उठाव करने वाले से प्रति सौ सेप्टिक का 250 सौ रूपये से 300 रूपये तक ली जा रही हैं यह हम नहीं कह रहे है नदी से बालू उठाव कर चालान कटाने वाले व्यक्ति कह रहे पहले सुने क्या कह रहे हैं…

तो आपने सुना सौ रूपये की चालान पर मुखिया द्वारा कितने की वसुली की जा रही हैं जिसके कारण 600 सौ और 700 सौ रूपये में बिकने वाला बालू हजारों रूपये में बिक रहे हैं जिसका सीधा बोझ आम जनता पर पड़ रही हैं।आइए जानते हैं खनन विभाग द्वारा नदी घाटों से बालू उठाव के क्या नियम हैं।अपने परिसीमन से ही बालू उठाव कर सकते है,नदी घाटों में 10 से अधिक ट्रैक्टर प्रवेश नहीं कर सकते हैं,बिना चालान एवं रॉयल्टी दिए बैगर बालू का उठाव नहीं कर सकते हैं,ग्रामीण क्षेत्र का बालू आस पास के पंचायतों में ही बिक्री कर सकते है इसे व्यवसाई करण नहीं कर सकते हैं,सरकारी योजनाओं निर्माण में उचित मूल्यों पर बालू बिक्री कर सकते हैं..

परंतु इस सभी नियमों को ताख पर रख कर पुरे क्षेत्रों के नदी घाटों से बालू का खेल बदस्तूर जारी हैं जिससे राज्य सरकार को प्रतिदिन करोड़ों का चुना लगाया जा रहा हैं पुरे जिले कर में इसका बहुत बड़ा नेटवर्क हैं इन दिनों निरसा विधानसभा के बेजड़ा घाट,मैथन घाट, पंचेत घाट एव चिरकुंडा के सुन्दर नगर बालू घाटों में खेल जारी है और तो और प्रत्येक घाटों से प्रतिदिन दर्जनों ट्रैक्टरों को चालान दी जाती है मगर बालू का उठाव सैकड़ो ट्रैक्टरों एव हाईवा के जरिए किया जा रहा हैं एक ही चालान पर प्रतिदिन प्रत्येक ट्रैक्टर चार से पांच बार बालू का उठाव कर रहे हैं जिसके कारण बालू आम आदमी तक पहुंचते पहुंचते इसकी कीमत आसमान छू रहे हैं..

NEWSANP के लिए धनबाद से कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट

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