रांची(RANCHI): झारखंड स्टेट बिवरेज कॉरपोरेशन ने प्लेसमेंट एजेंसियों से 448 करोड़ रुपये की वसूली के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. कॉरपोरेशन ने प्लेसमेंट एजेंसियों द्वारा दायर याचिका पर हाइकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. सुप्रीम कोर्ट ने प्लेसमेंट एजेंसियों को अपनी बैंक गारंटी की वैधता कोर्ट के अगले आदेश तक बरकरार रखने का आदेश दिया है. साथ ही मामले की सुनवाई जनवरी 205 में करने का फैसला किया है. उल्लेखनीय है वित्तीय वर्ष 2022-23 में राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के सुझाव पर नयी शराब नीति लागू की थी. इसमें झारखंड स्टेट बिवरेज कॉरपोरेशन के माध्यम से खुदरा दुकानों के संचालन का प्रावधान किया गया था. इन दुकानों में. मैन पावर सप्लाई के लिए चार प्लेसमेंट एजेंसियों को चुना गया था. इसमें ए-टू जेड इंफ्रा, सुमित फैसिलिटीज, प्राइम-वन वर्कफोर्स और इगल हंटर शामिल हैं…
गारंटी रेवेन्यू का लक्ष्य पूरा नहीं करने पर दंड की वसूली का प्रावधान किया था. इसके तहत सरकार द्वारा बिक्री के लिए न्यूनतम लक्ष्य को पूरा नहीं करने वाली कंपनियों से दंड वसूलना था. उत्पाद नियमावली की धारा 15 में किये गये इस प्रावधान के आलोक में बिवरेज कॉरपोरेशन ने ए-टू जेड पर 121.78 करोड़, सुमित फैसिलिटिज पर 136.93 करोड़, प्राइम-वन पर 107.45 करोड़ और इगल हंटर पर 81.07 करोड़ रुपये की वसूली की प्रक्रिया शुरू की थी. संबंधित कंपनियों ने झारखंड बिवरेंज कॉरपोरेशन द्वारा की गयी इस कार्रवाई को हाइकोर्ट में चुनौती दी थी. प्लेसमेंट एजेंसियों की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि झारखंड उत्पाद नियमावली 2022 की धारा नियम सम्मत नहीं है. साथ ही यह असंवैधानिक भी है. उत्पाद नियमावली की यह धारा संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1) (जी) और 265 के प्रतिकूल है….
NEWSANP के लिए रांची से ब्यूरो रिपोर्ट

