धनबाद(निरसा)।चुनाव में किए गए वादे के अनुसार झारखंड सरकार राज्य के सहारा इंडिया के निवेशकों एवं अभिकर्ताओं, जिनकी जमा राशि का भुगतान नहीं हुआ है तथा मृत्यु हो गई है को आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। झारखंड देश का पहला राज्य है जिसने सहारा इंडिया के निवेशकों एवं अभिकर्ताओं के स्वजनों की सुध लेने का काम किया है। साथ ही सहारा इंडिया के जमाकर्ताओं एवं अभिकर्ताओं की लड़ाई लड़ रहे विश्व भारती जन संवाद संस्थान को हर संभव सहयोग करेगी। साथ ही संस्थान द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में सहारा इंडिया के खिलाफ दायर रिट याचिका के लिए की लड़ाई लड़ने के लिए अपने खर्चे पर वकील उपलब्ध कराएगी। उक्त बातें निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने शुक्रवार को विश्व भारती जन सेवा संस्थान के कार्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि अन्य संस्थाएं भी जिन्होंने राज्य के लोगों के पैसे की धोखा घड़ी की है उनकी लड़ाई भी संस्थान लड़ने को तैयार है। बशर्ते धोखा घड़ी के शिकार कंपनी के निवेशक एवं अभिकर्ता संस्थान के समझ आकर अपनी बातें रखें। उन्होंने कहा कि मैं अपने पिछले कार्यकाल में नॉन बैंकिंग कंपनियों के खिलाफ सरकार से मांग की थी। मेरी मांग पर राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को मामले की रिपोर्ट की थी। केंद्र सरकार द्वारा नॉन बैंकिंग कंपनियों के खिलाफ सीबीआई जांच चल रही है। हम लोग केंद्र सरकार पर दबाव बनाएंगे कि जल्द से जल्द सीबीआई जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करें तथा दोषियों पर कार्रवाई करें। जांच रिपोर्ट आने के बाद राज्य सरकार से मिलकर नॉन बैंकिंग कंपनियों के निवेशकों को भी सहायता दिलवाने के लिए प्रयास करूंगा। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए संस्थान के केंद्रीय सचिव नागेंद्र कुमार कुशवाहा ने झारखंड सरकार द्वारा सहारा इंडिया के मृतक निवेशकों एवं अभिकर्ताओं की सुध लेने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय नहीं चाहता कि सहारा इंडिया के निवेशकों एवं अभिकर्ताओं के पैसे का भुगतान हो। तभी तो सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय संख्या आईए नंबर 56308 आफ 2023 रीट पिटीशन (सी) 2022 केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय द्वारा सहारा सेबी रिफंड खाते से 5 हजार करोड़ रूपया लिया गया था। परंतु सहारा रिफंड पोर्टल पर क्लेम करने वालों को 26 नवंबर 2024 तक मात्र 1200 करोड़ रूपया ही दिया गया। सहारा सेबी रिफंड खाते में लगभग 25700 करोड रुपए कई वर्षों से निष्क्रिय पड़े हुए हैं। केंद्र सरकार उस फंड से केवल 5000 करोड़ रूपया का ही रिफंड क्यों लिया। केंद्र सरकार सारे पैसे निकाल कर देश के 13 करोड़ निवेशकों को भुगतान कर सकती थी। परंतु पूरे पैसे क्यों नहीं निकले गए यह अपने आप में कई सवाल खड़ा करता है। और तो और सहारा रिफंड पोर्टल पर क्लेम करने वाले 99% लोगों का क्लेम रिजेक्ट कर दिया गया है और उनसे कहा गया है कि आप समिति के मेंबर ही नहीं है। जबकि सारे निवेशकों ने सहारा इंडिया द्वारा निर्गत की गई अपना समस्त सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, पैन कार्ड पोर्टल पर लोड किया था। अगर 99% जमाकर्ताओं का सहारा द्वारा दिया गया दस्तावेज जाली है तो केंद्र सरकार ने सोसाइटियों के डायरेक्टरों और सहारा के अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है। केंद्र सरकार इतने बड़े फर्जीबाड़ा को दबा कर बैठी हुई है। जब कि इस फर्जी वाला के कारण अभी तक देश भर में 10000 लोग आत्महत्या कर लिए हैं और लाखों शहर के एजेंट घर से बेघर हो गए हैं। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष जनार्दन मिश्रा ने कहा कि सुब्रत राय सहारा के दोनों पुत्र सिमंतो राय और सुशांतो राय करोड़ जमाकर्ताओं का धन लेकर विदेश (मेसिडोनिया) छिपे हुए हैं और वहां राजशाही जीवन जी रहे हैं।यह सहारा इंडिया के निवेशकों का धन है। यहां तक की सुब्रत राय के मरने के बाद भी उनके दोनों पुत्र भारत अपने पिता को मुखाग्नि देने को भी नहीं आए। केंद्र सरकार उनके प्रत्यार्पण की कार्रवाई क्यों नहीं कर रही। सहारा इंडिया ने जमा कर्ताओं का पैसा लेकर एमबे भेली में ₹65000 करोड रुपए का निवेश किया है। जमाकर्ताओं के पैसे से देश-विदेश में अपार संपत्ति खरीदी है। इन संपत्तियों को बेचकर देश के 13 करोड़ जमाकर्ताओं को क्यों नहीं भुगतान किया जा रहा है।प्रेस वार्ता में संस्थान के अशोक कुमार राम, संजीत मोदी, समीर चंद्र, अमरेश चक्रवर्ती, मृत्युंजय कुमार इत्यादि मौजूद थे।
NEWS ANP के लिए निरसा से संतोष की रिपोर्ट…

