जामताड़ा(JAMTARA): पश्चिम बंगाल सरकार के मौखिक निर्देश पर प्रदेश से आलू का निर्यात को रोक दिया गया है। प्रदेश के लगभग सभी अंतराज्यीय चेक पोस्ट से आलू के ट्रकों को बंगाल पुलिस झारखंड में प्रवेश नहीं करने दे रही है..
सभी ट्रंकों को वापस वह संबंधित कोल्ड स्टोरेज के लिए लौटा रही है। इससे झारखंड में आलू संकट गहराने लगा है। गाड़ी लौटने से बड़ी मात्रा में आलू सड़ रहा है। जिसका नुकसान झारखंड के व्यवसायियों को होने लगा है। इसका सीधा असर आम उपभोक्ता पर पड़ रहा हैं। आलू का दाम लगातार बढने से उपभोक्ता विचलित हो गए हैं। इससे निजात पाने के लिए जामताड़ा चेंबर्स आफ कामर्स ने पाटोदिया धर्मशासाला में पीसी किया। जहां हेमंत सोरेन सरकार से पहल करने का अनुरोध किया है। एक आकलन के अनुसार जामताड़ा में पांच से आठ ट्रक आलू का प्रत्येक दिन खपत है। हम आपको बताते चलें कि इस सप्ताह के बाद बंगाल का नया आलू बाजार में आ जाएगा..
जिसका बाजार में बेहतर दाम मिले। इसके लिए आपको हर वर्ष बंगाल सरकार आलू डिप्लोमेसी का खेल खेलती है। या यह कह सकते हैं कि आलू व्यापार को बंगाल सरकार प्रमोट करते रहीं हैं। झारखंड में बंगाल के आलू को अघोषित रोक से पूराने आलू का दाम बेतहाशा बढ़ता है। ठीक उसी वक्त बंगाल का आलू का नया पैदावार आ जाता है। जिससे खरिददार बढ़े किमत में बिना ना नुक्कड़ खरीदते है। पश्चिम बंगाल का एक पहलू यह भी है..
यहां का मुख्य खाद्य मछली-भात और आलू है। इससे यहां के किसान और सरकार को दोनों माला माल रहती है। बंगाल में मौसम का मिजाज धान और आलू पैदावार के लिए अनुकूल रहता है। वहीं औसत वर्षापात के लिए मछली का बंपर उत्पादन भी होता है। इस तीनों कृषि उत्पादन से राज्य सरकार के खजाने में बेशुमार धन बरसता है। लिहाजा इसके प्रमोशन के लिए समय समय पर बंगाल सरकार लगातार सक्रिय रहती है..
इन्हें इसके प्रमोशन से कोई गुरेज नहीं है। बावजूद इसके कि इसके दुष्परिणाम का सामना जामताड़ा के व्यापारी और उपभोक्ता कर रहे हैं। जिसे लेकर जामताड़ा चेंबर्स आफ कामर्स के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने पीसी में झारखंड सरकार को पहले करने का जहां सुझाव दिया है। वहीं चेंबर्स के सदस्यों ने आलू को लेकर बढ़ी परेशानियां का बिन्दु वार जानकारी दी है..
NEWSANP लिए जामताड़ा से आर पी सिंह की रिपोर्ट

