झारखंड(JHARKHND): झारखंड में विधानसभा चुनाव बाद परिणाम का घमासान थम चुका है। बीजेपी बैकफुट पर ही नहीं बल्कि मैदान से ही बाहर हो चुकी है। 2024 में 2019 से भी कमजोर विपक्ष सदन में देखने को मिलेगा। आजसू और बीजेपी के खराब प्रदर्शन की वजह से इंडिया गठबंधन आत्मविश्वास से लबरेज है।उनकी खुशियां हिलोरे मार रही हैं।खासकर जेएमएम और खुद हेमंत सोरेन का आत्मविश्वास दहाड़ मार रहा है..
28 को एक बार फिर से हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री पद का शपथ लेने वाले हैं। उससे पहले कांग्रेस- जेएमएम और राजद तीनों पार्टियों में मंत्री पद के उम्मीदवारों को लेकर लॉबिंग तेज है। जेएमएम के मंत्री पदके दावेदार रांची के पदाधिकारियों का फोन घनघना रहे हैं, तो वहीं कांग्रेस के मंत्री पद के दावेदार रांची से लेकर दिल्ली तक के पदाधिकारियों के लगातार संपर्क में हैं। तीनों पार्टियों के पुख्ता सूत्रों के हवाले से जो बातें छन कर बाहर आ रही है के मुताबिक कि आखिर कौन वो चेहरे हैं, जो हेमंत के साथ 28 नवंबर को शपथ ले सकते हैं।झारखंड मुक्ति मोर्चा की बात की जाए तो सबसे पहले पार्टी संथाल और कोल्हान पर फोकस करेगी ..
इन दोनों प्रमंडलों ने जेएमएम, कांग्रेस और राजद की झोली विधायकों से भर दी है। कोल्हान से इस बार दो मंत्री बनाए जाने की पूरी संभावना है।जानकारों और पुख्ता सूत्रों का कहना है कि एक बार फिर से दीपक बिरुआ और रामदास सोरेन पर हेमंत भरोसा जता सकते हैं। रामदास सोरेन घाटशिला और दीपक बिरुआ चाईबासा से विधायक चुने गए हैं। दोनों हेमंत के कैबिनेट में बतौर मंत्री काम कर चुके हैं। वहीं अल्पसंख्यक समुदाय से हफिजुल हसन को रिपीट किया जा सकता है। वैसे साहेबगंज से एमटी राजा भी अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं। लेकिन फिलहाल हफिजुल हसन ही रेस में आगे चल रहे हैं। वहीं संथाल से दूसरा मंत्री स्टीफन मरांडी या फिर लुईस मरांडी को बनाया जा सकता है..
स्टीफन जेएमएम के पुराने वफादार हैं तो लुईस ने जेएमएम की कसौटी पर खरा उतरने का काम किया है। बीजेपी से खटपट और अनबन के बाद लुईस ने जेएमएम का हाथ थामा और जामा सीट जीतकर जेएमएम के झोली में डाला है। वहीं महतो फोल्डर की बात की जाए तो मथुरा महतो और योगेंद्र प्रसाद महतो में से कोई एक इस बार मंत्री पद की शपथ ले सकता है। मथुरा महतो जेएमएम के पुराने स्तंभ हैं, चौथी बार विधायक बने हैं। उन्हें तवज्जो मिलने की पूरी संभावना है। योगेंद्र भी खुद हेमंत सोरेन के काफी करीबी माने जाते हैं। कुल मिलाकर कहा जा रहा है कि हेमंत सोरेन को मिलाकर जेएमएम की तरफ से छह मंत्री होंगे। हेमंत के अलावा सात का नाम रेस में है। इनमें से किसी पांच पर मुहर लगने की पूरी संभावना है।जेएमएम के बाद सबसे ज्यादा मंत्री कांग्रेस पार्टी से बनने हैं।इनकी संख्या चार हो सकती है..
लेकिन दावेदार कहीं ज्यादा हैं। संथाल से इरफान अंसारी का नाम अल्पसंख्यक समुदाय के कोटे से तय माना जा रहा है। तो वहीं संथाल से दो और नाम रेस में आगे हैं। पहला नाम महगामा विधायक दीपिका पांडेय सिंह का है। वो हेमंत कैबिनेट में करीब चार महीने मंत्री रह चुकी हैं।दिल्ली तक इनकी मजबूत पकड़ है..
वहीं प्रदीप यादव ने भी इस बार कैबिनेट में जगह बनाए जाने के ले एड़ी चोटी का जोर लगाया है। अगड़ी जाति के कोटे की बात की जाए तो बीजेपी के धुरंधर रविंद्र पांडे और जेएलकेएम के सुप्रीमो जयराम महतो को चुनावी मैदान में शिकस्त देने वाले बेरमो विधायक जयमंगल सिंह उर्फ अनुप सिंह का नाम भी हो सकता है..
वहीं पलामू प्रमंडल से भानू प्रताप शाही को हराने वाले अनंत प्रताप देव भी रेस में अपने आप को बनाए हुए हैं। आदिवासी क्रिशचन समुदाय से अगर रामेश्वर उरांव का नाम कटता है तो राजेश कच्छप पर पार्टी भरोसा जता सकती है। हालांकि रामेश्वर उरांव की सीनियरटी को देखते हुए कांग्रेस को यह फैसला लेने में काफी कठिनाई आ सकती है..
रेस में सबसे पीछे नमन विक्सल कोंगारी हैं।अगर राजद की बात की जाए तो वैसे चारों के चारों विधायक अपने आप को रेस में बनाए हुए हैं। लेकिन पुख्ता सूत्रों का कहना है कि लालू एंड फैमिली ने देवघर से बीजेपी के उम्मीदवार को पटखनी देने वाले सुरेश पासवान के नाम पर हरि झंडी दे दी है..
NEWSANP के लिए झारखंड से ब्यूरो रिपोर्ट

