कबाड़ और जुगाड़ से पहले बनाया रामल्ला की हु बहु मूर्ति अब उसी तकनीक से रामलल्ला को सूर्य तिलक करवाकर लोगों को करा रहा दिव्य दर्शन…

भगवान श्री राम के प्रति बंगाल के इस युवक की दिखी अनोखी भक्ति…

दुर्गापुर(DURGAPUR): पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर के रहने वाले छोटन घोष इन दिनों खूब चर्चे मे हैं और हो भी क्यों नही क्योंकि छोटन ने काम ही ऐसा किया है की उन्होंने बंगाल के एक छोटे से शहर मे रहकर कबाड़ और जुगाड़ की मदद से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के सहयोगी वैज्ञानिक संस्था इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (IIA) को टक्कर दे डाली है,

छोटन ने थर्माकोल, जीरा विभिन्न प्रकार के दाल, ग्लूगन का इस्तेमाल कर पहले तो साढ़े चार फुट का रामलल्ला का हु बहु मूर्ति बनाकर चर्चे मे आया जिसके बाद छोटन ने अपने रामल्ला को हर रोज सूर्य तिलक करवाने के लिए लेंस, कांच और प्लास्टिक के पाईप की मदद से सूर्य की पहली किरणों को रामल्ला के ललाट तक पहुँचाने का काम कर और भी सुर्खियों मे आ गया,

छोटन की अगर माने तो बचपन से ही उसको श्री राम के प्रति अटूट आस्था है, जब उत्तर प्रदेश के अयोध्या मे श्री राम मंदिर का निर्माण हुआ और उक्त मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियां शुरू हुई तो उसके मन मे भी राम लल्ला के लिए कुछ अनोखा करने की इच्छा जागी और उसने 20 किलो की पार्ले जी बिस्किट की मदद से चार फुट लंबी और चार फुट चौड़ी हु बहु अयोध्या के तरह ही दिखने वाली राम मंदिर बना डाली,

रामनवमी के मौके पर अयोध्या श्री राम मंदिर मे विराजमान रामल्ला की मूर्ति को सूर्य तिलक करवाने मे अपनी अहम् भूमिका निभाने वाले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के सहयोगी वैज्ञानिक संस्था इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (IIA) वैज्ञानिकों ने ऑप्टिकल मैकेनिकल सिस्टम बनाया था. वैज्ञानिको द्वारा रामलला के ललाट पर सूर्य तिलक के लिए लगातार सूर्य की पोजीशन की स्टडी की गई. जिसके बाद वैज्ञानिकों ने बहुत सामान्य टूल्स का इस्तेमाल किया.

चार लेंस और चार शीशे की मदद से सूरज की किरणों को सीधे तौर पर लेंस पर फॉल कराया गया और वहां से चार शीशे के जरिए रामलला के ललाट पर रोशनी पहुंचाई गई, हालांकि यह सिस्टम अस्थाई तौर पर लगा है. जब मंदिर की संरचना पूरी हो जाएगी,

तब इस सिस्टम को स्थाई तौर पर लगा दिया जाएगा, वैज्ञानिकों के इस कार्य को देख छोटन काफी प्रभावित हुआ और उसने भी लेंस और कांच का इस्तेमाल कर प्लास्टिक के पाईप की मदद से सूर्य की पहली किरण को अपने हांथों से बनाए गए रामल्ला की मूर्ति के ललाट पर सूर्य तिलक करवाने मे सफल रहा, छोटन की अगर माने तो उसके हाँथो से बनाई गई यह मूर्ति साढ़े चार फुट की है और उसके हाँथो से बनाई गई मूर्ति पर हर रोज भगवान सूर्य करीब दो मिनट तक सूर्य तिलक करेंगे,

छोटन की इस अनोखी तकनीक को देखने व बंगाल मे विराजमान रामल्ला के दर्शन करने के लिए अब लोगों की भीड़ उमड़ रही है, हर कोई हैरान और परेशान है की इस छोटे से इलाके मे रहने वाला एक मामूली युवक आखिरकार ऐसा कर कैसे सकता है

NEWS ANP के लिए प०बंगाल से अमरदेव की रिपोर्ट..

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