धनबाद(DHANBAD)देश की कोयला राजधानी में उड़ती कोयले की धूल में अभी चर्चा लोकसभा चुनाव की चर्चा चरम पर है. इस बार के दंगल में कमल खिलेगा या नहीं. यह भी एक प्रश्न है. हालांकि, इस बार बीजेपी का झंडा हाथ में लेकर पहली बार मैदान में उतरे बाघमारा के विधायक ढुल्लु महतो की चर्चा और तेवर जोरों पर हैं.
उनके नाम के ऐलान के तक़रीबन तीन हफ्ते हो गए हैं. लेकिन, उनकी टक्कर किससे होगी, अभी तक यह एक सवाल बना हुआ हैं.
इंडिया गठबंधन की सहयोगी कांग्रेस की इस सीट में आखिर उम्मीदवार कौन होगा?. मंथन और चिंतन ही दौर चल रहा हैं. आखिर अपने पत्ते कांग्रेस पार्टी कब खोलेगी?. यही इंतजार में कइयों का मन बैचेन हो गया है…
हालांकि, दावेदार तो कई ताल ठोक रहें हैं, पर प्रश्न फ़िजा में यही घूम रहा हैं कि, ढुल्लु महतो से मुकाबला किसे करना हैं?.
इसके चलते, धनबाद का आवाम भी बैचन और आतुर हैं कि पंजे से किसे टिकट मिलेगा?. सच्चाई तो यही हैं कि ढुल्लु महतो को इससे मनोवैज्ञानिक फायदा मिल रहा हैं और फ़जीहत झारखण्ड कांग्रेस के आलाकमान की हो रही है.
मौज़ूदा वक़्त में ढुल्लु महतो धनबाद के चुनावी मैदान में खुलकर बल्लेबाजी कर रहें. इसके जरिये जीत के लिए तमाम समीकरण साधने में, आसानी हो रही है. अभी से ही खुले मैदान में चौके -छक्के भी बरसा रहें है, क्योंकि अभी मैदान में विपक्ष का कोई फिल्डर ही तैनात नहीं है. जहा भी बॉल मारे गेंद बाउंड्री ही पार कर रही है.
बेशक, आगे ढुल्लु के लिए ये माहौल आगे साजगार नहीं रहेगा, आगे उनकी राह में कांग्रेस का कोई प्रत्याशी तो सामने होगा ही. लेकिन, मौक़े की नजाकात और मुफीद वक़्त का तो फायदा, वह तो उठा ही रहें है. जो की ये घड़ी कांग्रेस के लिए सही नहीं है. इससे मतदाताओ के सामने ही एक नकारात्मक संदेश जा रहा है. सवाल बस यही है कि आखिर किस चिज़ के चलते देरी हो रही है? आखिर झारखण्ड कांग्रेस के सामने कौन सी मज़बूरी उन्हें कचोट रही है?
सवाल सिर्फ धनबाद के ही प्रत्याशी के ऐलान का नहीं है, बल्कि, रांची, गोड्डा और चतरा में भी, कुछ ऐसा ही हाल है.
ढुल्लु महतो के बीजेपी से टिकट मिलने के बाद से ही कुछ खटपट देखने को मिली. विधायक सरयू राय से उनका विवाद अभी भी परवान पर ही दिखाई पड़ रहा है. जो लगता इसकी बानगी आगे भी दिखाई पड़ेगी, क्योंकि इन दोनों के बीच लड़ाई की आग अभी बुझी नहीं है.
ढुल्लु महतो ये जानते है की लोकसभा चुनाव उनके लिए एक सख्त इम्तिहान है, जहा उन्हें पास करने के लिए काफ़ी मशक्कत और मेहनत करनी पड़ेगी. क्योंकि ये सच्चाई है की यहां की लड़ाई बाहरी बनाम भीतरी की होने वाली है. लिहाजा, ऐसी सूरत में अपनों से भी भिड़ंत अंदर ही अंदर होगी. लिहाजा, वहां भी उन्हें जीत दर्ज करनी होगी. साथ ही जवाब उन्हें भी देना होगा जो उनकी उम्मीदवारी पर शक और ऐतराज़ जता रहें थे. अपने राजनीतिक करियर के इस सबसे बड़ी परीक्षा में उन्हें पास करना सबसे बड़ी चुनौती है…
खैर अभी धनबाद के चुनावी मैदान में ढुल्लु महतो खुलकर बैटिंग कर रहें है और आने वाले वक़्त में उनकी बल्लेबाजी से भाजपा जीतती है या नहीं. ये देखना ही बेहद दिलचस्प होगा. क्योंकि धनबाद लोकसभा सीट का परिणाम की नजर पर सिर्फ झारखण्ड की ही नहीं बल्कि देश की निगाहें भी टिकी रहेगी…
NEWS ANP के लिए कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट…
