
मैथन(DHANBAD): अध्यात्म मानव जीवन की अपरिहार्य आवश्यकता है। इसके द्वारा हमारे जीवन का संपूर्ण विकास होता है। विहंगम योग का सैद्धान्तिक सद्ग्रन्थ स्वर्वेद अध्यात्म जगत की एक अन्यतम कृति है। यह हमारी आध्यात्मिक यात्रा को सदैव जागृत रखता है।
उक्त बातें विहंगम योग के संत प्रवर विज्ञान देव जी महाराज ने मैथन डैम,गोगना मैदान में चल रहे विहंगम योग के प्रणेता सद्गुरु सदाफल देव जी महाराज की 138 वीं जन्म जयंती के पावन अवसर पर विहंगम योग समारोह एवं जय स्वर्वेद कथा में द्वितीय दिवस पर उपस्थित हजारों भक्तों के मध्य व्यक्त किये।
संत प्रवर जी महाराज ने कहा कि स्वर्वेद का आचरण मनुष्य को देवत्व में स्थापित कर देता है। जब हम आत्म कल्याणकारी विचारों से अपने मन को भरते हैं तब हमारा मन शांत और स्थिर स्वभाव वाला बन जाता है।
महाराज जी ने दिव्यवाणी के दौरान बताया कि जीवन और सत्य कोई दो वस्तु नहीं, जीवन कहें या सत्य कहें। जीवन मेता ही है। क्योंकि जीवन का आधार परमात्मा है। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति अयोग्य नहीं। अच्छाइयां – बुराइयां सबके भीतर है। हमे दुर्बलताओं, कठिनाइयों से घबराना नहीं है। उन कठिनाइयों को दूर करने की जो प्रेरणा, जो शक्ति, जो सामर्थ्य है वह अध्यात्म के आलोक से, स्वर्वेद के स्वर से एक साधक को अवश्य ही प्राप्त होता है। क्योंकि हमारे भीतर अंतरात्मा रूप से परमात्मा ही तो स्थित है।
इसके पूर्व प्रातः 7 से 9 बजे तक शारीरिक आरोग्यता के निमित्त आसन प्राणायाम एवं ध्यान का सत्र संचालित हुआ। जिसमे हजारों योग साधक उदर विकार , मोटापा , मधुमेह, उच्चरक्तचाप, हाइपरटेंशन, अस्थमा आदि असाध्य रोगों से निज़ात पाने का गुर सीखे।
बुधवार को दिन में 11 बजे से 5100 कुंडीय विश्वशांति वैदिक यज्ञानुष्ठान का शुभारंभ संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज के कर कमलों द्वारा अ अंकित श्वेत ध्वजारोहण कर दीप प्रज्जवन के साथ हुआ।
भव्य एवं आकर्षक ढंग से सजी यज्ञ वेदियों में वैदिक मंत्रों की ध्वनि के बीच यज्ञानुरागियों द्वारा व्यष्टिगत एवं समष्टिगत लाभ हेतु आहुतियों को प्रदान किये।
यज्ञ के उपरांत मानव मन की शांति व आध्यात्मिक उत्थान के निमित्त ब्रह्मविद्या विहंगम योग के क्रियात्मक ज्ञान की दीक्षा आगत नए जिज्ञासुओं को दिया गया ।
इस आयोजन में प्रतिदिन निःशुल्क योग, आयुर्वेद, पंचगव्य, होम्योपैथ आदि चिकित्सा पद्धतियों द्वारा कुशल चिकित्सकों के निर्देशन में रोगियों को चिकित्सा परामर्श भी दिया जा रहा है। जिसका लाभ आगत भक्त शिष्यो के साथ क्षेत्रीय लोग भी प्राप्त कर रहे हैं।
आगत भक्तों के लिए अनवरत भण्डारा चल रहा है। भोजन व्यवस्था में दिक्कत न हो इसके लिये चार बड़ा भोजनालय में ताकि सहजता से सभी को भोजन प्रसाद प्राप्त हो सके।
इस कार्यक्रम में विहंगम सेवा केंद्र का भव्य वृहत स्टाल लगा है जहाँ पर आश्रम द्वारा प्रकाशित सैकड़ो साहित्य, आध्यात्मिक मासिक पत्रिका , विशुद्ध जड़ी बूटियों से निर्मित आयुर्वेदिक औसाधियाँ, गो आधारित पंचगव्य औषधियों आदि सेवा प्रकल्पों का केंद्र बना हुआ है।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से जीपी सिंह, रत्नेश कुमार सिंह, सुखनंदन सिंह सदय, उदय प्रताप सिंह, केपी श्रीवास्तव, नागेश्वर मेहता, रविंद्र अम्बष्ट, शेष नारायण सिंह, आरडी शर्मा, दयाकांत, आशुतोष शेखर, डब्ल्यू सिंह, श्रीमती किरण सिंह, बिजेन्द्र सिंह, रंजीत सिंह, श्रीनाथ यादव, हिमांशु शेखर सिंह, निधि सिंह, ऊषा सिंह, अरूण कुमार पाण्डेय, एमपी सिंह, रानी शर्मा, अंजू सिंह, निशि शेखर, गीता सिंह सहित हजारों महिला-पुरूष शामिल थे।
NEWSANP के लिए धनबाद से कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट

