
जामताड़ा(DHANBAD):सोशल मीडिया पर टकराव: भाजपा नेता भानु प्रताप शाही और झारखंड के मंत्री इरफान अंसारी के बीच जुबानी जंग सोशल मीडिया पर खूब ट्रेंड कर रही है। दोनों नेताओं के वीडियो खूब चर्चा में हैं, जिसमें वे अपने-अपने अंदाज में एक-दूसरे पर कटाक्ष कर रहे हैं।
मंत्री इरफान अंसारी की चुनौती:विवाद की शुरुआत इरफान अंसारी द्वारा गिरिडीह मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को चुनौती देने से हुई। अपने तीखे बयान में अंसारी ने कहा कि रघुवर दास का समय खत्म हो चुका है और जनता ने उन्हें नकार दिया है। उन्होंने इससे पहले चुनाव के वक्त सीता सोरेन पर भी निशाना साधा था। अब रघुवर दास को पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व राज्यपाल थे को भी “रिजेक्ट” कहा है ।
” भाजपा नेता भानु प्रताप शाही ने अपनी खास अंदाज में मूंछों को घुमाते हुए इरफान को जवाब दिया।
उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में अंसारी के हिंदुओं की रक्षा करने के अधिकार पर सवाल उठाया और अंसारी बनने से पहले उनके यादव वंश के बारे में उनके पिता द्वारा दिए गए एक पुराने बयान को याद दिलाया है। शाही ने यह कहने में संकोच नहीं किया कि हिंदू संरक्षण पर अंसारी का रुख गलत लगता है।
- मंत्री के लिए गंभीर सलाह:
- शाही ने इरफान अंसारी को याद दिलाया कि केवल मंत्री का दर्जा ही अनर्गल बयानबाजी को उचित नहीं ठहराता। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अंसारी अपनी बेतुकी बातें जारी रखते हैं, तो उन्हें भी मुंहतोड़ जवाब मिलेगा। – व्यंग्यात्मक तंज: अंसारी के राजनीतिक सफर का मजाक उड़ाते हुए शाही ने कहा कि मंत्री को आत्म-प्रशंसा और अनावश्यक उकसावे में लिप्त होने के बजाय मुद्दों को सुलझाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने अंसारी को याद दिलाया कि रघुवर दास अपके पिता के दौर से ही कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं और उनके प्रभाव को नकारना नासमझी होगी।
- जिम्मेदारी का आह्वान: शाही ने परोक्ष रूप से अंसारी से धार्मिक भावनाओं के साथ राजनीति करना बंद करने और मंत्री के रूप में अधिक जिम्मेदारी से काम करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि झारखंड का माहौल बेतुकी बयानबाजी से खराब नहीं होना चाहिए।
- सार्वजनिक प्रतिक्रिया:
- सोशल मीडिया उपयोगकर्ता दोनों नेताओं के बीच अप्रत्याशित टकराव का आनंद ले रहे हैं, दोनों वीडियो को हास्य और आलोचना के साथ साझा और प्रतिक्रिया कर रहे हैं। ऑनलाइन नैरेटिव राजनीतिक कीचड़ उछालने पर हावी है, और इस सब के बीच लोकतंत्र की गरिमा जमीन खोती दिख रही है।
बयान बहादुर इरफान अंसारी ने आग में क्या क्या और कितना डाला घी
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने हाल ही में गिरिडीह में हुई हिंसा के संबंध में पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास और अन्य भाजपा नेताओं को संबोधित करते हुए कई तीखी टिप्पणियां कीं। नीचे उनके बयानों का विस्तृत ब्यौरा है:
1. भाजपा नेताओं पर आरोप:
मंत्री अंसारी ने भाजपा नेताओं पर होली के दौरान गिरिडीह में अशांति फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने विशेष रूप से बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रघुबर दास के प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने पर सवाल उठाया। यह सुझाव देते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई मौजूदा तनाव को बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। अंसारी ने भाजपा नेताओं को राज्य की शांति को बाधित करने के खिलाफ चेतावनी दी और जोर दिया कि हेमंत सोरेन सरकार सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
2. बाबूलाल मरांडी पर टिप्पणी:
अंसारी ने प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
3. धार्मिक सद्भाव की रक्षा:
अंसारी ने बाहरी प्रभावों, खासकर पड़ोसी छत्तीसगढ़ की आलोचना की (उनका इशारा रघुवर दास की ओर था) और उन पर स्थानीय अधिकारियों को धमकाने और सांप्रदायिक सद्भाव को बाधित करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। मंत्री ने जोर देकर कहा कि भाजपा का सनातन हिंदू धर्म पर एकाधिकार नहीं है और वर्तमान सरकार राज्य में हिंदुओं के अधिकारों और सुरक्षा की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
4. रघुबर दास को संदेश:
अंसारी ने कहा कि पिछली असफलताओं के बावजूद रघुबर दास ने अपना दृष्टिकोण नहीं बदला है। उन्होंने दास को याद दिलाया कि उनका कार्यकाल समाप्त हो चुका है। और जनता उन्हें रिजेक्ट कर चुकी है। उन्होंने उनसे झारखंड के माहौल को बिगाड़ने वाले कार्यों से परहेज करने का आग्रह किया। citeturn0search12
5. न्याय प्रतिबद्धता: अंसारी ने इस बात पर जोर दिया कि भाजपा नेताओं द्वारा दिए गए किसी भी बयान की जो प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) में दर्ज किया गया है, उसकी पूरी तरह से जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री को इन घटनाक्रमों से अवगत कराएंगे और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने पर जोर दिया। अंसारी के बयानों के जवाब में, भाजपा नेता भानु प्रताप शाही ने मंत्री की आलोचना की और उन पर राज्य के ज्वलंत मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। शाही के पलटवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी काफी समर्थन मिल रहा है।दोनों पक्षों के नेता गिरिडीह में हाल की घटनाओं के बारे में सार्वजनिक चर्चा में सक्रिय रूप से शामिल हैं, जिससे झारखंड में बढ़ते राजनीतिक तनाव की बात सामने आ रही है।
NEWSANP के लिए धनबाद से आर पी सिंह की रिपोर्ट

