दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम की वो रात जश्न से ज्यादा सूर्यकुमार यादव के लिए एक इंतकाम का पूरा होना था, जो उनकी ब्रिगेड ने पाकिस्तान को एकतरफा शिकस्त देकर पूरा कर लिया, जैसे कुछ महीने पहले भारतीय जवानों ने पाकिस्तान के आतंक की बस्ती और उनके सरपरस्तो की जमीन बारूद से खोखली कर दी थी.. ऑपरेशन सिंदूर के जरिये जवानों ने पाकिस्तान के आतंकी नकाब को नोच फेंका और कर करारा जवाब दिया.
एशिया कप में पाकिस्तान से मुकाबले को लेकर पहले से ही तनाव पसरा था, मैच नहीं खेलने को लेकर सड़क से सोशल मीडिया तक विरोध की आग सुलगकर भड़की हुई थी.
खेलने और नहीं खेलने को लेकर तरह -तरह के तर्क और तमाशा देखने को मिला. बीसीसीआई और सरकार से सवाल पूछे जा रहें थे. आखिर उस जंग और शहादत के मोल पर क्रिकेट क्यों खेलना? जिसके जख्म अभी तक हरे के हरे है?
इधर क्रिकेटर भी क्या करते उन्हें तो देश के लिए खेलना ही था, क्योंकि मुकाबले में नहीं उतरने और खुद से मैच बॉयकट की बात तो नहीं कर सकते.थे क्योंकि उनकी भी अपनी मजबूरियां और बीसीसीआई के नियम -कायदे से बंधे हैं. सूर्यकुमार की सेना ने पाक के साथ मैच खेला और उस पहलगाम का बदला क्रिकेट के मैदान में लेने की ठानी. वो भी मैदान में जंग से कम नहीं लड़ रहें थे. जिस तरह भारत के बहादुर जांबाजों ने आसानी से पाकिस्तान को उसके घर में घुसकर सारी हेकड़ी निकली. ठीक उसी तरह दुबई के मैदान में बेहद आसान और हल्के मैच में पाकिस्तान को 7विकेट से रौद कर उसकी औकात बता दिया.
पूरे मैच के दौरान भारतीय प्लेयर्स ने पाकिस्तानीयों को हराने के साथ घनघोर बेइज्जती की, क्योंकि भारतीय सशस्त्रबलों की वीरता और शहादत को किसी भी कीमत पर कम नहीं होने देना चाहते थे.जिन्होंने सरहद पर देश के लिए खून बहाया और देशवासियों को महफूज रखा.
क्रिकेटर्स ने इस बदले की बानगी और झरोखा मैच के शुरुआत से लेकर अंत तक दिखाया . इतना ही नहीं ड्रेसिंग रूम तक गुस्सा और विरोध के आग की लपटे दिखी.
अमूमान मैच के शुरुआत में टॉस के समय दोनों कप्तान हाथ मिलाते हैं.जो अक्सर टीवी में देखने को मिलता है.लेकिन कैप्टन सूर्यकुमार यादव ने विपक्षी कप्तान सलमान आगा से हाथ तो क्या नजर से नजर भी नहीं मिलाई .दरअसल यह पहली बेज्जती का आगाज पाकिस्तान क्रिकेट टीम के खिलाफ थी. इसके बाद सूर्यकुमार यादव ने छक्के मारकर मैच जिताया और शिवम दुबे के साथ ड्रेसिंग रूम के लिए सीधे चल दिए. पाकिस्तान टीम हाथ मिलाने के लिए इंतजार ही करते ही रह गई. भारतीय टीम के सपोर्ट स्टॉफ ने भी पाकिस्तानियों को भाव नहीं दिया. ये अपमान का करारा तमाचा पाक टीम के गाल पर लगा. जिसे पूरी दुनिया ने देखा.
भारतीय टीम ने ऐसा पहलगाम आतंकी हमले के विरोध और भारतीय सेना के समर्थन में किया.
कप्तान सूर्यकुमार यादव ने यह शानदार जीत सशस्त्र बलों को समर्पित किया और कहा कि उनकी टीम पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों के साथ खड़ी है.
भारत -पाकिस्तान का जब भी कोई मैच होता रहा है, खासकर क्रिकेट में तो इसे लेकर एक अलग तरह का रोमांच होता है. बेसब्री से फैन्स मैच का इंतजार करते हैं . लेकिन इस बार उत्साह से ज्यादा लोग मैच के बॉयकट के पक्ष में थे. क्योंकि देश का अवाम पाकिस्तान की नापाक फितरत देखते आया हैं, और जंग और क्रिकेट एक साथ नहीं हो सकते. दरअसल,पहलगाम आतंकी हमले में जिस तरह मासूम सैलानियों से मजहब पूछ कर मौत की नींद सुलाई गई.अभी भी उनके परिजनों के आँखों के आंसू सूखे नहीं हैं. ऐसे में भला दुश्मन मुल्क से क्रिकेट क्यों खेला जाए ? सवाल लाजिमी है कि ये प्रश्न सिर उठायगा और उठा भी?.
खैर टीम इंडिया ने क्रिकेट के मैदान में देश के मान को बरकरार रखा. जिस तरह ऑपरेशन सिंदूर में सेना ने हिंदुस्तान की शान में खरोंच तक नहीं आने दी.एशिया कप में टीम इंडिया कि यह जीत भारतीय सेना और आतंकी हमले में मारे गए लोगों को समर्पित है.
NEWS ANP के लिए शिवपूजन सिंह की रिपोर्ट

