सीएसआईआर-सीआईएमएफआर, धनबाद में मनाया गया 84वां सीएसआईआर स्थापना दिवस…

सीएसआईआर-सीआईएमएफआर, धनबाद में मनाया गया 84वां सीएसआईआर स्थापना दिवस…

धनबाद(DHANBAD):“सिंफर ने लिया वैज्ञानिक उत्कृष्टता और राष्ट्र निर्माण में सीएसआईआर की विरासत को आगे ले जाने का संकल्प”
धनबाद, 23 सितंबर 2025 – वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की 84वें स्थापना दिवस समारोह का आयोजन सीएसआईआर – केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान (CIMFR), धनबाद में उत्साहपूर्वक किया गया। इस अवसर पर 1942 में CSIR की स्थापना से लेकर अब तक की वैज्ञानिक उत्कृष्टता और राष्ट्र निर्माण में योगदान को रेखांकित किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। सीएसआईआर-सीआईएमएफआर के निदेशक प्रोफेसर अरविंद कुमार मिश्रा ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने भारत की आत्मनिर्भरता की यात्रा में सीएसआईआर की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया कि कैसे यह संस्था ब्रिटिश काल में स्थापित होकर भारत को एक वैज्ञानिक महाशक्ति बनाने में सहायक रही है। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर की उपलब्धियाँ जीवन के हर क्षेत्र – जल, वायु, भूमि, और पृथ्वी के केंद्र तक – में फैली हुई हैं। प्रो. मिश्रा ने सीआईएमएफआर की महत्वपूर्ण परियोजनाओं जैसे खानों का बंदीकरण, पर्यावरणीय स्थिरता, भारतीय सेना, डीआरडीओ, और हवाई अड्डों को दी जा रही तकनीकी सहायता का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान खनन क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी वैज्ञानिक समाधान के माध्यम से राष्ट्रीय समस्याओं को सुलझाने हेतु समर्पित रहेगा।

विशिष्ट अतिथि सुब्रमणियन राजगोपालन, पूर्व महानिदेशक, डीजीएमएस, ने सीएसआईआर को आठ दशकों से अधिक की प्रभावशाली सेवा के लिए बधाई दी। उन्होंने इस अवसर पर बोलने का मौका देने के लिए सीएसआईआर-सीआईएमएफआर का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह संस्था स्वतंत्रता से पूर्व की कुछ चुनिंदा वैज्ञानिक संस्थानों में से एक है, जो समय के साथ और सशक्त हुई है। उन्होंने भारत की कोविड-19 महामारी के दौरान दिखाई गई आत्मनिर्भरता की सराहना करते हुए कहा कि “आत्मनिर्भर भारत” की अवधारणा ही “विकसित भारत” के निर्माण की नींव है। उन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर” का उल्लेख करते हुए भारत की रणनीतिक और वैज्ञानिक क्षमताओं को रेखांकित किया। साथ ही, उन्होंने जापान के खनन प्रणाली का उदाहरण देते हुए भारत में डिजिटल माइनिंग और खनन सुरक्षा हेतु आईटी आधारित समाधान अपनाने पर बल दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि सीएसआईआर-सीआईएमएफआर इस क्षेत्र में नेतृत्व प्रदान कर सकता है और अमृत काल के दौरान भारत की वैज्ञानिक प्रगति को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ जोड़ने में भूमिका निभा सकता है।

प्रो. डी.डी. मिश्रा, अध्यक्ष, अनुसंधान परिषद, सीएसआईआर-सीआईएमएफआर ने सीएसआईआर की स्थापना के प्रारंभिक दौर की चर्चा की। उन्होंने बताया कि किस प्रकार ब्रिटिश शासनकाल में वैज्ञानिक संस्थाओं की स्थापना, भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक रणनीतिक कदम था। उन्होंने खनन अनुसंधान के बदलते स्वरूप, प्रशासनिक चुनौतियों और भारतीय समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्य अतिथि महेंद्र कुमार गुप्ता, संयुक्त सचिव (प्रशासन), सीएसआईआर, ने “सीएसआईआर में आईटी-सक्षम अनुसंधान एवं विकास प्रशासन की दृष्टि” विषय पर स्थापना दिवस व्याख्यान दिया। अपने पहले सीआईएमएफआर दौरे पर उन्होंने संस्थान के कार्यों की सराहना करते हुए इसे उद्योग और समाज दोनों के लिए एक महत्त्वपूर्ण सहयोगी बताया। श्री गुप्ता ने पारंपरिक प्रशासनिक प्रक्रियाओं में आने वाली बाधाओं जैसे कि कागजी कार्यवाही, जटिल अनुमोदन प्रक्रियाएँ और वास्तविक समय में जानकारी की कमी को रेखांकित किया। उन्होंने एक आधुनिक, पेपरलेस और आईटी-सक्षम प्रशासनिक प्रणाली की आवश्यकता बताई, जो पारदर्शिता बढ़ाए, निर्णयों को डेटा आधारित बनाए और सीएसआईआर को डिजिटल युग में और अधिक कुशल बनाए।

समारोह में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को स्मृति चिन्ह और सीआईएमएफआर कर्मचारियों के बच्चों को उनकी उपलब्धियों के लिए पुरस्कार प्रदान किए गए।
डॉ. पी.के. बनर्जी, उत्कृष्ट वैज्ञानिक, सीएसआईआर-सीआईएमएफआर, ने सभी अतिथियों, कर्मचारियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
समापन में वृक्षारोपण का आयोजन हुआ, जो पर्यावरणीय संरक्षण और सतत विकास के प्रति सीएसआईआर की प्रतिबद्धता का प्रतीक था।

NEWSANP के लिए धनबाद से कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट

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