धनबाद(SINDRI): महिला शिक्षा सम्मान और अधिकार की अलख जगाने वाली भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले जी की 195वीं जयंती पर अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति(एडवा) सिंदरी नगर कमेटी की ओर से 7 लेक रोहडांबाध में श्रद्धांजलि सभा एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
सबसे पहले उपस्थित बहनों ने ज्ञान की देवी सावित्रीबाई फुले के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा आज 3 जनवरी महिला शिक्षा के लिए क्रांति का दिवस है। सावित्रीबाई फुले ने उस समय पर महिला शिक्षा का संकल्प लिया जब लड़कियों की शिक्षा को पाप माना जाता था, जब एक महिला का स्कूल जाना समाज के खिलाफ विद्रोह माना जाता था। सावित्रीबाई फुले ने 1848 में भारत का पहला बालिका विद्यालय की स्थापना की। विद्यालय पढ़ाने जाने पर उनको गाली दी जाती थी, पत्थर फेकें जाते थे और कीचड़ उछाले जाते थें। लेकिन सावित्रीबाई फुले रुकी नहीं। सावित्री बाई फूले और फ़ातिमा शेख़ ने मिलकर महाराष्ट्र के इलाक़े में लड़कियों का पहला स्कूल खोला और इसका बहुत सकारात्मक असर इस इलाक़े में दिखा। बड़ी संख्या में लड़कियाँ पढ़ने स्कूल जाने लगीं। उन्हीं का संघर्ष का परिणाम है कि आज बेटियां डॉक्टर, इंजीनियर और ऑफिसर बन रही है।
कार्यक्रम में वरिष्ठ एडवा नेत्री रानी मिश्रा, एडवा नेत्री सह समाजसेवी अनामिका तिवारी, एडवा सिंदरी नगर कमेटी अध्यक्ष सविता देवी कोषाध्यक्ष रंजू प्रसाद, ने अपना वक्तव्य रखा।
श्रद्धांजलि सभा में क्रांति मोदक, रूबी तंतुबाई, चंपा देवी, सोनाली मोदक, चंपा मोदक आदि उपस्थित थी।
NEWS ANP के लिए सिंदरी से राज कुमार शर्मा के साथ प्रेम प्रकाश शर्मा की रिपोर्ट।

