सरस्वती विद्या मंदिर सिनीडीह में मातृ सम्मेलन का भव्य आयोजन, मातृशक्ति एक सामान्य शक्ति नहीं अपितु दैविक शक्ति–विधायक शत्रुघ्न महतो

सरस्वती विद्या मंदिर सिनीडीह में मातृ सम्मेलन का भव्य आयोजन, मातृशक्ति एक सामान्य शक्ति नहीं अपितु दैविक शक्ति–विधायक शत्रुघ्न महतो

फ़ुलारिटांड़(धनबाद) 14 दिसंबर 2024 को सरस्वती विद्या मंदिर सिनीडीह के प्रांगण में अहिल्या बाई होलकर के त्रिशताब्दी के अवसर पर मातृ सम्मेलन का भव्य आयोजन हुआ। कार्यक्रम का प्रारंभ मुख्य अतिथि-बाघमारा विधानसभा के विधायक शत्रुघ्न महतो, विशिष्ट अतिथि जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह ,विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष-गोविंदपुर क्षेत्र संख्या 3 के महाप्रबंधक गणेश चंद्र साहा, समिति सदस्य उत्तम गयाली एवं प्रधानाचार्य राकेश सिन्हा के कर- कमलों से दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। अतिथि परिचय आचार्य अजय कुमार पांडेय ने कराया।कार्यक्रम की प्रस्तावना को प्रस्तुत करते हुए डॉ० निशा तिवारी ने कहा कि विद्या भारती की कार्य योजना में मातृ सम्मेलन का विशेष महत्व है। हमारी भारतीय परंपरा में नारियों का विशेष स्थान है। माताएं सतत् संवेदनशील बनी रहे इस हेतु इस प्रकार का आयोजन होता है। दीदीजी कुमारी नमिता ने रसोईघर की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रसोई घर की खानपान की वस्तुओं में औषधीय गुण विद्यमान है। उचित मात्रा में किया गया प्रयोग आरोग्यता प्रदान करता है। दीदी जी विनीता कुमारी ने भैया- बहनों के विकास में माता की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि परिवार बच्चों का प्रथम पाठशाला है, जिसमें माता को प्रथम गुरु का सम्मान प्राप्त है। माता को अपने बच्चों के प्रति हमेशा सजग रहना चाहिए। अपने व्यस्त समय में से कम से कम एक घंटा अपने बच्चों पर भी देना चाहिए। मुख्य अतिथि विधायक शत्रुघ्न महतो ने कहा कि माता श्रद्धा के पात्र हैं। विद्यालय द्वारा इस प्रकार का आयोजन समाज में जागरूकता लाने का काम करता है। यहां पढ़ने वाले बच्चे आईएएस, आईपीएस जैसे महत्वपूर्ण पद को प्राप्त किए हैं, यह गौरव की बात है। ऐसे भैया- बहनों की सफलता में इन माताओं का भी विशेष योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है।

विशिष्ट अतिथि जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह ने कहा कि बच्चे जब मनोरम भाव से मां शब्द का उच्चारण करते हैं तो मां का कोमल हृदय आह्लादित हो जाता है। आज जिम्मेदारी से मुक्ति के लिए मां बच्चों के हाथ में मोबाईल थमा देती है, यह यह बड़ी ही चिंतनीय स्थिति है। मां केवल जन्मदात्री ही नहीं अपितु बच्चों का सचेतक भी होती है। बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने में मां का विशेष योगदान होना चाहिए ‌‌। खासकर बेटी को शारीरिक एवं मानसिक रूप से सबल बनाना मां का विशेष कर्तव्य है। शिशु विद्या मंदिर केवल बच्चों को शिक्षित ही नहीं करता बल्कि नैतिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों से भी परिपूर्ण करता है। उन्होंने विद्यालय की जल समस्या को दूर करने का भी आश्वासन दिया।प्रधानाचार्य श्रीमान राकेश सिन्हा ने अपने उद्बोधन के क्रम में कहा कि माताएं शक्ति स्वरूपा होती हैं। वे बच्चों का सदैव हित चाहती हैं। विद्यालय में भैया -बहन जो सीखते हैं उसका फीडबैक लेना माता का परम धर्म है। आपका हर सुझाव विद्यालय के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा। अभिभावक संपर्क में जब हमारे आचार्य दीदीजी आपके घर जाते हैं तो अपने बच्चों की गतिविधि के बारे में अवश्य चर्चा करें। अपने अध्यक्षीय भाषण में प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष गणेश चंद्र साहा ने कहा कि कहा कि माता का स्थान सर्वोपरि है। भैया- बहनों का सर्वांगीण विकास हमारा लक्ष्य है। इस लक्ष्य की पूर्ति में माता का सहयोग पूर्ण रूप से अपेक्षित है। मंच संचालन प्रियंका बागची ने किया। धन्यवाद ज्ञापन सुतपा विश्वास ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के सभी आचार्य दीदी जी एवं कर्मचारी बंधु भागने का सक्रिय सहयोग रहा। अनिता कुमारी के द्वारा शांति मंत्र के उपरांत कार्यक्रम का समापन हुआ।

NEWS ANP के लिए सौरभ की रिपोर्ट

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