बिहार(BIHAR): लोक सभा चुनाव में भले अनंत सिंह को सरकार ने पैरोल पर बाहर निकाला ,मुंगेर में चुनाव प्रचार करवाया.चुनाव जितने के बाद AK-47 मामले में उनकी रिहाई भी हो गई.लेकिन एकबार फिर से मोकामा में गोलीबारी कांड को अंजाम देने के बाद अनंत सिंह सरकार के निशाने पर आ गये हैं.उनकी गिरफ्तारी तो पहले ही हो चुकी है अब जेल से बाहर नहीं निकलने की व्यवस्था भी कर दी गई है.इतना ही नहीं, अनंत सिंह जेल से मोबाइल फोन के जरिये गैंग ऑपरेट न कर सकें, रविवार की आधी रात पुलिस ने बेउर जेल में रेड कर पूर्व विधायक अनंत सिंह के वार्ड में गहन तलाशी अभियान चलाया.
बाहुबली पूर्व विधायक अनंत सिंह की 14 दिनों की हिरासत के बाद बेउर जेल में यह पहली बार छापेमारी की गई है.गनीमत है इस छापेमारी में कोई संदिग्ध सामग्री नहीं मिली है.गौरतलब है कि जेल के अंदर पैसे लेकर विशेष कैदियों को विदेश सुविधाएं देने के कई मामले सामने आ चुके हैं. ऐसे में अनंत सिंह कहीं अपने रसूख या पैसे का इस्तेमाल कर कोई खेल तो नहीं कर रहे , पुलिस ने उनके वार्ड की सघन तलाशी ली. हाल ही में बेऊर जेल में अवैध वसूली के मामलों का खुलासा हुआ था, जिसमें तत्कालीन जेल अधीक्षक और एक कक्षपाल पर आरोप लगे थे कि वे कैदियों से सुविधाओं के नाम पर पैसे ले रहे थे. आर्थिक अपराध इकाई (EOU) द्वारा पहले की गई जांच में इस बात के पुख्ता सबूत मिले थे.
जेल में हुई इस छापेमारी से कैदियों में हड़कंप मच गया. इस छापेमारी का नेतृत्व दानापुर के एएसपी ने किया और इसमें कई थाना प्रभारी भी शामिल थे. पुलिस इसे एक रूटीन चेकिंग बता रही है.लेकिन जानकारों का कहना है कि अनंत सिंह की नकेल कसने की कोशिश का ये संकेत है.अनंत सिंह मोबाइल फोन के जरिये जेल से अपना गैंग ऑपरेट नहीं कर पायें, पुलिस ने जेल में रेड किया.पुलिस की इस कारवाई से जाहिर है कि भले अनंत सिंह ने लोक सभा चुनाव में सत्ताधारी दल की मदद की, नीतीश सरकार के विश्वासमत के दौरान आरजेडी को दगा देकर सरकार का साथ दिया लेकिन सरकार उन्हें गुंडागर्दी की छूट देकर सुशासन पर बट्टा लगवाने के मूड में नहीं है.
अनंत सिंह को 21 जनवरी 2025 को मोकामा में हुई गोलीबारी के बाद गिरफ्तार किया गया था और उन्हें बेऊर जेल भेजा गया था. अनंत सिंह की जिस सोनू-मोनू गैंग से अदावत है, वह भी सत्ताधारी दल से ही जुटा है.अनंत सिंह को करार जबाब देकर वह हीरो बन चूका है.अब सरकार और पुलिस का सहयोग अनंत सिंह की जगह उसे ज्यादा मिल सकता है.अनंत सिंह बूढ़े हो चुके हैं. ऐसे में दो नौजवान भाइयों का गैंग सोनू-मोनू उनके ऊपर भारी पड़ता नजर आ रहा है.वैसे भी सत्ता का चरित एक होता है.सत्ता के शीर्ष पर बैठा प्रभु उसी का साथ देता है जो मजबूत होता है.
NEWSANP के लिए बिहार से ब्यूरो रिपोर्ट

