
धनबाद(DHANBAD):आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में चल रहे शताब्दी फ़ाउंडेशन वीक का दूसरा दिन आज बेहद महत्वपूर्ण और ऊर्जा से भरा रहा। पेनमैन ऑडिटोरियम में आयोजित डीएसटी–PAIR इवेंट में देशभर से आए विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों और छात्रों ने क्रिटिकल मिनरल्स, जियो-एनर्जी और जियोसाइंसेज़ से जुड़े नए तकनीकी रास्तों पर गहन चर्चा की। कार्यक्रम ने साफ कर दिया कि आने वाले वर्षों में भारत की मिनरल सुरक्षा और ऊर्जा परिवर्तन में आईआईटी (आईएसएम) की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और संस्थान की 100 साल की यात्रा पर बनी एक विशेष वीडियो से हुई। इसके बाद अप्लाइड जियोलॉजी, अप्लाइड जियोफिज़िक्स, माइनिंग इंजीनियरिंग और एफएमएमई विभागों के वरिष्ठ प्रोफेसरों ने अपनी तकनीकी उपलब्धियाँ साझा कीं, जिनमें स्मार्ट माइनिंग, नए एक्सप्लोरेशन मॉडल, स्वच्छ ऊर्जा तकनीकें और संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर किए जा रहे कार्य शामिल थे। स्वागत संबोधन प्रो. भंवर सिंह चौधरी (विभागाध्यक्ष, माइनिंग) ने दिया।
निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि देश विक्सित भारत 2047 की ओर तेजी से बढ़ रहा है और आईआईटी (आईएसएम) का दायित्व है कि वह इस यात्रा में तकनीकी नेतृत्व दे। उन्होंने बताया कि कैसे कला और विज्ञान विभागों ने डिजिटल तकनीकों को अपनाकर नए प्रयोग और मॉडल तैयार किए हैं। उन्होंने TEXMi की पहल की सराहना की, जो शोध को तेजी से उच्च TRL स्तर तक ले जाने में मदद कर रहा है। उन्होंने ज़ोर दिया कि अब समय है कि मूलभूत शोध को व्यावहारिक और बाजार में उपयोग होने वाली तकनीक में बदला जाए।
कार्यक्रम के दौरान शामिल उद्योग और अकादमिक जगत के विशेषज्ञों ने भी अपने महत्वपूर्ण विचार रखे। IIEST शिबपुर के निदेशक प्रो. वी. एम. एस. आर. मूर्ति ने कहा कि आईआईटी (आईएसएम) का शैक्षणिक वातावरण और विभागों के बीच सहयोग इसे देश के खनन और भूविज्ञान क्षेत्र का अग्रणी संस्थान बनाता है। उन्होंने बताया कि भविष्य में AI/ML, डिजिटल टूल्स, रिमोट सेंसिंग और एडवांस्ड रीसाइक्लिंग तकनीकें संसाधन प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।
ऊर्जा क्षेत्र पर अपनी बात रखते हुए IOCL के बिहार राज्य प्रमुख संजीव कुमार चौधरी ने कहा कि दुनिया तेज़ी से टिकाऊ ऊर्जा की ओर बढ़ रही है और भारत को ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता और समानता तीनों को संतुलित करना होगा। उन्होंने IOCL के नेट-जीरो लक्ष्य, सोलराइजेशन, बायोफ्यूल, हाइड्रोजन और EV चार्जिंग की पहलों की जानकारी दी। उन्होंने IIT(ISM) के साथ चल रहे CSR आधारित सोलर हाइड्रोजन क्लीन-कुकिंग प्रोजेक्ट की विशेष प्रशंसा की।
ECL के निदेशक (टेक्निकल–ऑपरेशंस) नीलाद्रि रॉय ने कहा कि दुनिया में कोयले से हटकर रिन्यूएबल एनर्जी पर जोर बढ़ रहा है, जिससे कोयला उत्पादन पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत को तेजी से बदलते ऊर्जा परिदृश्य के अनुरूप अपने मॉडल तैयार करने होंगे। उन्होंने रेखांकित किया कि भविष्य में बैटरी और ऊर्जा स्टोरेज तकनीकें ही रिन्यूएबल सिस्टम को मजबूत बनाएँगी और इसके लिए क्रिटिकल मिनरल्स की बड़ी आवश्यकता होगी।
कार्यक्रम में शामिल प्रसिद्ध भूवैज्ञानिक और आईएसएम एलुमनस प्रो. हर्ष कुमार गुप्ता ने कहा कि आज भारत को आधुनिक जियो-एनर्जी समाधानों, उन्नत सिस्मिक तकनीक और डेटा-ड्रिवन एक्सप्लोरेशन की बेहद जरूरत है। उन्होंने बताया कि नई तकनीकें देश की मिनरल खोज, संसाधन मूल्यांकन और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभाएँगी।
दिन भर आयोजित तकनीकी चर्चाओं में विशेषज्ञों ने क्रिटिकल मिनरल्स की खोज, डीप-अर्थ इमेजिंग, सिस्मिक सुरक्षा, स्मार्ट और सस्टेनेबल माइनिंग और मिनरल सुरक्षा नीति जैसे विषयों पर विचार साझा किए। वक्ताओं ने कई बार कहा कि पिछले 100 वर्षों में आईआईटी (आईएसएम) ने जो वैज्ञानिक आधार तैयार किया है, वही आज देश के खनन और भूविज्ञान क्षेत्र का दिशा-निर्देशक है।
स्कूल छात्रों ने जियोफिजिकल फील्ड चैलेंज, क्विज़ और डिज़ास्टर-मैनेजमेंट डेमो में उत्साह से भाग लिया। वाइल्डलाइफ़ कंज़र्वेशन डे से जुड़ी गतिविधियों ने यह संदेश दिया कि तकनीकी विकास के साथ पर्यावरणीय संवेदनशीलता भी बेहद आवश्यक है। शाम को AVAY Dramatics, LITM और WTC की प्रस्तुति ने पूरे दिन के शैक्षणिक माहौल को सांस्कृतिक रंग में बदल दिया।
पूरा दिन एक संदेश बार-बार सामने लाता रहा—कि 100 वर्षों बाद भी आईआईटी (आईएसएम) देश के जियोसाइंस, मिनरल स्ट्रैटेजी और ऊर्जा शोध का केंद्र बना हुआ है, और आने वाले वर्षों में भी भारत के मिनरल भविष्य, सिस्मिक सुरक्षा और टिकाऊ संसाधन प्रबंधन में इसकी भूमिका और मजबूत होने वाली है।
NEWSANP के लिए धनबाद से कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट

