झरिया(JHARIA): लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ मंगलवार को नहाय-खाय के साथ कोयलांचल में भी शुरू हो गया। महापर्व के प्रथम दिन व्रतियों ने भगवान सूरज की पूजा अर्चना के बाद अरवा चावल राहर या चने की दाल एवं कद्दू की सब्जी ग्रहण किया। जिसे नहाए खाए कहा जाता है। झरिया सहित विभिन्न क्षेत्रों में अनेक समाजसेवी संस्था द्वारा निशुल्क कद्दू वितरण की गई। सूर्य षष्ठी व्रत को लेकर बाजार में आम की लकड़ी सहित पूजन की सामग्रियां बिकने के लिए सजी हुई हैं।छठ व्रत से जुड़े लोकगीतों के प्रसारण से संपूर्ण कोयलांचल भक्ति के सागर में डूब गया है।धनबाद मनाई टांड़ स्थित छठ तालाब सराय दे, राजेंद्र सरोवर के अलावा झरिया राजा तालाब सिंह नगर तालाब ऐना छठ तालाब पूरी तरह सज धज कर तैयार है।चार दिवसीय छठ महापर्व के दूसरे दिन बुधवार को खरना अनुष्ठान करेंगे, जिसमें दिनभर निर्जल रहकर शाम में पूजा अर्चना के बाद खीर और रोटी का सेवन करेंगे। तदुपरांत उनका 36 घंटे का उपवास शुरू होगा।प्राचीन काल से जारी है छठ पूजा की परंपरा कार्तिक मास में भगवान सूर्य की पूजा की परंपरा है। शुक्ल पक्ष में षष्ठी तिथि को इस पूजा का विशेष विधान है..
इस पूजा की शुरुआत मुख्य रूप से बिहार और झारखण्ड से हुई जो अब देश-विदेश तक फैल चुकी है। अंग देश के महाराज कर्ण सूर्य देव के उपासक थे, इसलिए परंपरा के रूप में सूर्य पूजा का विशेष प्रभाव इस इलाके पर दिखता हैं। कार्तिक मास में सूर्य अपनी नीच राशि में होता है, इसलिए सूर्य देव की विशेष उपासना की जाती है ताकि स्वास्थ्य की समस्याएं परेशान ना करें. षष्ठी तिथि का सम्बन्ध संतान की आयु से होता है, इसलिए सूर्य देव और षष्ठी की पूजा से संतान प्राप्ति और उसकी आयु रक्षा दोनों हो जाती है। इस माह में सूर्य उपासना से वैज्ञानिक रूप से हम अपनी ऊर्जा और स्वास्थ्य का बेहतर स्तर बनाए रख सकते हैं।लगातार 36 घंटे तक चलता निर्जला व्रतछठ व्रत के दौरान व्रतधारी (व्रत करने वाले) लगातार 36 घंटे का व्रत रखते हैं। इस दौरान वे पानी भी ग्रहण नहीं करते। वैसे तो ये पर्व बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में मुख्य रूप से मनाया जाता है, लेकिन अन्य स्थानों पर भी छठ पर्व के प्रति लोगों की आस्था देखने को मिलती है..
NEWSANP के लिए झरिया से अरविंद सिंह बुंदेला की रिपोर्ट

