जामताड़ा (JAMTADA):झारखंड का नगर विकास विभाग इन दिनों जनाकांक्षाओं से दूर जाकर ऐसे फैसले की तैयारी में जुटा है, जिसे लेकर प्रदेश की राजनीति में घमासान मचने के आसार हैं। ‘रोशनी कर’ के नाम पर बिजली उपभोक्ताओं पर 5% सरचार्ज थोपने की योजना ने जनता और व्यापारियों के बीच हड़कंप मचा दिया है। यह प्रस्ताव न केवल गरीबों की जेब पर डाका डालने जैसा है, बल्कि राज्य सरकार की अब तक की महिला सम्मान व बिजली बिल माफी जैसी जनहितकारी छवि को धूमिल कर सकता है। आलोचक इसे “ऊपर से नमक, नीचे से रगड़” जैसी नीति बता रहे हैं।
नगर विकास विभाग की “दुधारू गाय” नीति?
संधान परगना क्षेत्रीय उपाध्यक्ष संजय अग्रवाल ने नगर विकास विभाग पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जनता को दुधारू गाय समझना बंद करें।*” उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर विभाग द्वारा तैयार किए गए उस मसौदा बिल का कड़ा विरोध किया है जिसमें झारखंड के *नगर निगम, नगर परिषद, नगर पंचायत क्षेत्रों में बिजली बिल पर 5% सरचार्ज* लगाने की योजना बनाई गई है।
इस प्रस्तावित सरचार्ज के तहत बिजली बिल का 5% हिस्सा सीधे नगर विकास विभाग को दिया जाएगा। यह राशि विद्युत उपकेंद्रों से वसूली जाएगी और नगर विकास विभाग एवं विद्युत विभाग के बीच अर्ध-भागीदारी में खर्च की जाएगी।
तुगलकी फरमान या जनविरोधी साजिश?
प्रस्ताव के अनुसार, झारखंड विद्युत उपभोग अधिकार नियमावली 2025 झारखंड नगर विकास अधिनियम 2011 की धारा 590 के तहत लागू की जाएगी। विभाग ने जनता की प्रतिक्रिया के लिए दो ईमेल (ud.secy@gmail.com और uddeprocurement@gmaim.com) जारी कर दावा किया है कि यदि आपत्ति नहीं आई तो इसे स्वीकृति मान ली जाएगी।
यानी चुप रहना यहाँ अपराध बन जाएगा। यह रवैया लोकतंत्र की उस बुनियाद को ही हिला देता है जिसमें जनमत सर्वोपरि माना जाता है।
बिजली दर बढ़ी ही थी, अब नया बोझ
गौरतलब है कि हाल ही में झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) ने बिजली दर में बढ़ोतरी का प्रस्ताव पेश किया था, जिसका व्यापक विरोध हुआ था। अब उसी कड़ी में 5% अतिरिक्त कर आम जनता की जेब ढीली करने वाला है।
सवाल उठता है कि जहां पहले से ही बिजली आपूर्ति न अनियमित है, न गुणवत्तापूर्ण, वहाँ ऐसी वसूली “न माया मिली न राम”* जैसी स्थिति को जन्म देगी। झारखंड जैसे राज्य में, जहां आर्थिक असमानता और कम आय वाले परिवारों की संख्या बहुत अधिक है, वहां यह कर “ऊंट के मुंह में जीरा” नहीं, बल्कि “छालों पर नमक”* जैसा है।
सरचार्ज की वैधानिकता पर भी सवाल
संजय अग्रवाल ने साफ किया कि अभी तक झारखंड बिजली वितरण निगम ने नियामक आयोग से इसकी मंजूरी नहीं ली है, फिर भी नगर विकास विभाग इसे लागू करने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया तो “सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन होगा।”
नगर निकायों की व्यवस्था खुद सवालों के घेरे में
प्रस्ताव की आलोचना करते हुए अग्रवाल ने कहा कि नगर निकायों की स्थिति खुद जर्जर है। सफाई, पेयजल, सड़क, स्ट्रीट लाइट — सब बदहाल हैं। पहले नगर निकाय “अपना घर सुधारें, फिर टैक्स की सोचें”। झारखंड के हर नगर निगम क्षेत्र में जनता पूछ रही है — “कहां है सुविधा, जो टैक्स मांगा जा रहा है?”
आज के परिप्रेक्ष्य में, नगर विकास विभाग की यह योजना “भैंस के आगे बीन बजाना” जैसा प्रतीत हो रहा है — जहां न जनसुनवाई हो रही है, न ही जमीनी सच्चाई पर ध्यान दिया जा रहा है।
रोशनी के नाम पर अंधकार?
प्रदेश सरकार ने अब तक महिलाओं को मुफ्त बिजली, गरीबों को राहत, किसान-मजदूर को सहूलियत जैसे फैसलों से अपनी साख बनाई थी। लेकिन इस नए प्रस्ताव ने उस छवि को धूमिल करने की पूरी भूमिका तैयार कर दी है। यह “एक पांव से मंदिर, दूसरे से बाज़ार” जैसी दोहरी नीति है।
जनता अब इस निर्णय को लेकर सड़क पर उतरने को तैयार है। क्योंकि इस प्रस्ताव ने “चिराग तले अंधेरा” वाली स्थिति ला दी है — रोशनी के नाम पर एक और ताजमहल तैयार किया जा रहा है, जिसकी नींव जनता की टूटी कमर पर रखी जा रही है।
सारांश:
- नगर विकास विभाग ने 5% बिजली सरचार्ज का प्रस्ताव तैयार किया।
- जनता से ईमेल द्वारा आपत्ति मांगी गई — नहीं तो लागू मान लिया जाएगा।
- व्यापारी और आम लोग दोनों विरोध में — सुविधा के नाम पर कुछ नहीं।
- प्रस्ताव बिना नियामक मंजूरी के तैयार — वैधानिकता पर सवाल।
- सड़क से सदन तक आंदोलन की चेतावनी।
- सरकार की जन-समर्थक छवि को गहरा झटका।
झारखंड की जनता पूछ रही है:
“जब घर में ही उजाला नहीं, तो कर किस बात का?”
अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री और नगर विकास मंत्री जनभावनाओं का सम्मान करते हैं या फिर यह फैसला झारखंड की राजनीति में एक नया विस्फोट करता है।
NEWSANP के लिए जामताडा से आर पी सिंह की रिपोर्ट

