रिटायरमेंट से एक दिन पहले CJI गवई का खुला ऐलान…

रिटायरमेंट से एक दिन पहले CJI गवई का खुला ऐलान…

दिल्ली(DELHI):रविवार को रिटायर हो रहे मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने अपने विदाई समारोह में परंपरा तोड़ते हुए अपने कुछ अहम फैसलों पर खुलकर बात की। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण फैसला ‘बुलडोजर जस्टिस’ के खिलाफ दिया गया अपना निर्णय बताया।

उन्होंने कहा कि बुलडोजर से घर गिराना कानून के शासन के बुनियादी सिद्धांत के पूरी तरह विपरीत है। किसी व्यक्ति पर अपराध का आरोप लगना या दोषी ठहराया जाना उसका व्यक्तिगत मामला है, इससे उसके परिवार, माता-पिता या बच्चों का क्या कसूर? आश्रय का अधिकार मौलिक अधिकार है और उसे इस तरह नहीं छीना जा सकता। सीजेआई गवई ने स्पष्ट किया कि कार्यपालिका एक साथ न्यायाधीश, जूरी और जल्लाद की भूमिका नहीं निभा सकती। उन्होंने बताया कि विदेशों में अपने व्याख्यानों में भी वे इस फैसले का जिक्र करते रहे हैं ताकि दुनिया देख सके कि भारतीय न्यायपालिका कानून के शासन की कैसे रक्षा करती है।

दूसरा सबसे अहम फैसला अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण में उप-वर्गीकरण (क्रीमी लेयर) को मंजूरी देने वाला था। सीजेआई ने कहा कि एक मुख्य सचिव के बेटे-बेटी और खेतिहर मजदूर के बच्चों को एक ही तराजू में तौलना संभव नहीं है। संसाधनों और अवसरों की इतनी बड़ी खाई होने पर सभी को एकसमान लाभ देना वास्तव में नई असमानता को जन्म देगा। बाबासाहेब अम्बेडकर के हवाले से उन्होंने कहा कि समानता का मतलब अंधाधुंध एकसमान व्यवहार नहीं है, बल्कि वास्तविक जरूरत के हिसाब से अलग-अलग व्यवहार करना है।

चूंकि रिटायरमेंट से एक दिन पहले उनका कोई न्यायिक काम शेष नहीं बचा था, इसलिए वे बेझिझक अपने फैसलों पर खुलकर बोल सके। उन्होंने यह भी बताया कि वे कभी सुप्रीम कोर्ट को ‘सीजेआई-केंद्रित’ संस्था नहीं बनने देना चाहते थे, इसलिए बड़े फैसलों से पहले हमेशा सभी सहकर्मियों से विचार-विमर्श करते थे। अपने छोटे से कार्यकाल में उन्होंने 107 हाई कोर्ट जजों की नियुक्ति की। कॉलेजियम की बैठकों के सौहार्दपूर्ण माहौल के लिए उन्होंने साथी जजों को धन्यवाद दिया, हालांकि यह भी जिक्र किया कि जस्टिस बीवी नागरत्ना ने जस्टिस विपुल पंचोली की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति की अनुशंसा पर विस्तृत असहमति पत्र लिखा था।

परंपरा से हटकर अपने फैसलों पर खुली टिप्पणी करते हुए सीजेआई गवई ने एक मजबूत संदेश छोड़ा कि न्यायपालिका न सिर्फ कानून की रक्षा करती है, बल्कि संवैधानिक मूल्यों को जीवंत भी रखती है।

NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

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