
जामताड़ा(JAMTADA): विद्यालय के सम्मान और सुरक्षा की माँग को लेकर उभरा जनाक्रोश, प्रशासन ने मांगें मानी शिक्षा और अनुशासन का पर्याय माने जाने वाले जामताड़ा स्थित जेपीसी प्लस टू विद्यालय उस वक्त आक्रोश का केंद्र बन गया जब इस विद्यालय के प्रधानाध्यापक और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक सुशील मरांडी की दर्दनाक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। यह खबर शहरभर में फैलते ही छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों में भारी रोष व्याप्त हो गया। मंगलवार सुबह विद्यालय के सैकड़ों छात्र-छात्राएं, शिक्षकगण और स्थानीय लोग सड़क पर उतर आए और मुख्य मार्ग को कई घंटों तक जाम कर विरोध प्रदर्शन किया।
विद्यालय की गरिमा और सुशील मरांडी का योगदान
जेपीसी प्लस टू विद्यालय न केवल जामताड़ा बल्कि पूरे संताल परगना प्रमंडल में एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान के रूप में जाना जाता है। इस विद्यालय ने कई होनहार छात्र देश-विदेश को दिए हैं। यहां के शिक्षक सुशील मरांडी, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत के राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित होकर जिले का गौरव बढ़ाया था, एक प्रेरणा-स्तंभ के रूप में माने जाते थे। उनका जीवन विद्यार्थियों के प्रति समर्पित था और उनकी सादगी, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता को सभी मानते थे।
उनकी असामयिक और दर्दनाक मौत केवल एक शिक्षक का निधन नहीं, बल्कि शिक्षा-जगत की एक रोशनी का बुझ जाना माना जा रहा है। यह वही स्थान है जहाँ से राष्ट्रपति सम्मान जैसी उपलब्धि निकलती है, और अब वहीं सुरक्षा की मांग के लिए छात्र और शिक्षक सड़क पर उतरने को मजबूर हो गए।
कैसे हुआ हादसा
कुछ दिन पहले विद्यालय गेट के सामने एक तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आने से सुशील मरांडी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन सोमवार को उन्होंने दम तोड़ दिया। हादसे के समय विद्यालय परिसर में पढ़ाई चल रही थी, जिससे पूरे विद्यालय परिवार को गहरा आघात पहुँचा।
सड़क जाम और प्रदर्शन
मंगलवार सुबह गुस्साए छात्र और शिक्षक सड़क पर उतर आए और स्कूल गेट के सामने मुख्य मार्ग को अवरुद्ध कर दिया। प्रदर्शन की अगुवाई वर्तमान प्रधानाचार्य एबीमाईल टुडू ने की। उनके साथ पूर्व शिक्षक, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। प्रदर्शन में भाजपा नेता वीरेंद्र मंडल, सुनील हसदा, विनोद क्षत्रिय, आकाश साव, और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित सेवानिवृत्त शिक्षक सुनील कुमार बास्की की उपस्थिति ने इसे और भी गंभीर स्वरूप दे दिया।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें थीं:
- विद्यालय गेट के सामने रोड ब्रेकर का निर्माण
- स्पीड लिमिट का बोर्ड लगाना
- तेज रफ्तार वाहनों पर सख्त कार्रवाई
- फुटपाथ की दुकानों को हटाना
- स्कूल गेट के पास हॉर्न बजाने पर पाबंदी
प्रशासन पर दबाव और समझौता
स्थिति को देखते हुए सदर थाना प्रभारी राजेश मंडल मौके पर पहुंचे, लेकिन प्रदर्शनकारी तब तक नहीं माने जब तक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी स्थल पर नहीं पहुंचे। बाद में प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रवीण चौधरी, अंचल अधिकारी अबीश्वर मुर्मू, और पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता घटनास्थल पर पहुंचे। लम्बी बातचीत के बाद प्रशासन ने सभी मांगों पर सहमति जताई।
प्रशासन द्वारा आश्वासन दिया गया कि:
- कुछ ही दिनों में रोड ब्रेकर लगाया जाएगा
- स्पीड लिमिट साइनबोर्ड और बैरिकेडिंग की जाएगी
- फुटपाथ की सभी अवैध दुकानें हटाई जाएंगी
- विद्यालय के सामने हॉर्न बजाने पर प्रतिबंध लगाया जाएगा
इसके बाद लोगों ने सड़क जाम हटाया और यातायात सामान्य हो गया।
स्थानीय जनभावना
शिक्षक सुशील मरांडी के निधन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि शिक्षा स्थलों की सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तो जनाक्रोश जन्म लेना तय है। जामताड़ा जैसे शहर में जहाँ शिक्षा की अलख जगाने वाले शिक्षक को राष्ट्रपति सम्मान मिला हो, वहाँ ऐसा हादसा प्रशासन की संवेदनहीनता की तरफ इशारा करता है। आज लोग यह सवाल पूछ रहे हैं — क्या हमारे समाज में एक शिक्षक की जान की कीमत इतनी कम है कि सड़क सुरक्षा तक की व्यवस्था नहीं की जा सकती?
चेतावनी
फिलहाल प्रशासन के आश्वासन के बाद जन आंदोलन शांत हुआ है, लेकिन स्थानीय लोगों की चेतावनी है कि यदि वादे पूरे नहीं किए गए, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। वहीं विद्यालय प्रबंधन व अभिभावक संघ ने घोषणा की है कि वे अब विद्यालयों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक अभियान चलाएंगे।
NEWSANP के लिए जामताड़ा से आर पी सिंह की रिपोर्ट

