राजनीतिक हिस्सेदारी अब अधिकार नहीं,आवश्यकता है : मुकुल आनंद…

राजनीतिक हिस्सेदारी अब अधिकार नहीं,आवश्यकता है : मुकुल आनंद…

पटना के गांधी मैदान में “विश्वकर्मा राजनीतिक अधिकार महारैली” का ऐतिहासिक आयोजन, देशभर से लाखों की भीड़, सत्ता में भागीदारी की बुलंद मांग

पटना(PATNA):राजधानी पटना का गांधी मैदान बुधवार को एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना, जब देशभर से आए विश्वकर्मा समाज के लाखों प्रतिनिधियों ने राजनीतिक अधिकारों की मांग को लेकर शक्ति प्रदर्शन किया। भारतीय विश्वकर्मा महासंघ द्वारा आयोजित इस विशाल “विश्वकर्मा राजनीतिक अधिकार महारैली” का नेतृत्व महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकुल आनंद विश्वकर्मा ने किया।

मंच से संबोधित करते हुए मुकुल आनंद ने साफ शब्दों में कहा, “राजनीतिक भागीदारी अब हमारा अधिकार नहीं, हमारी जरूरत बन चुकी है। अब समय आ गया है कि हमें सत्ता में सम्मानजनक भागीदारी दी जाए। बिहार की सभी बड़ी पार्टियों ने वर्षों से हमें केवल वोट बैंक समझा, लेकिन सत्ता में प्रतिनिधित्व देने से हमेशा कतराती रहीं। यदि आने वाले विधानसभा चुनाव में हमारी भागीदारी सुनिश्चित नहीं की गई, तो महासंघ वैकल्पिक रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होगा।”

उन्होंने आगे कहा, “बारिश जैसी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद गांधी मैदान में उमड़ी अपार भीड़ इस बात का प्रमाण है कि समाज अब जाग चुका है। मैं आप सभी का दिल से धन्यवाद करता हूँ कि आपने ऐसा मजबूत साथ दिया। यदि आगे भी आप ऐसे ही एकजुट रहे, तो हमें कोई भी राजनीतिक हिस्सेदारी मिलने से कोई रोक नहीं सकता।”

रैली में पंजाब से लेकर केरल, उत्तर प्रदेश से लेकर गोवा तक, देश के कोने-कोने से आए समाज के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया और मंच से अपनी आवाज बुलंद की। पंजाब से पूर्व राष्ट्रपति स्व. ज्ञानी जैल सिंह के पौत्र इंद्रजीत सिंह बब्बू ने कहा, “स्वतंत्रता संग्राम से लेकर राष्ट्र निर्माण तक विश्वकर्मा समाज का योगदान ऐतिहासिक रहा है, लेकिन हमें आज भी नजरअंदाज किया जा रहा है। अब यह अन्याय और नहीं चलेगा।” उत्तर प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री राम आसरे विश्वकर्मा ने दो टूक कहा, “राजनीतिक हिस्सेदारी कोई एहसान नहीं, यह हमारा हक है। समाज की उपेक्षा अब बर्दाश्त नहीं होगी।” हरियाणा से तेलु राम जांगड़ा, राजस्थान से मुकेश जांगिड, केरल से रितीश विश्वकर्मा, गोवा से मुकेश पांचाल, पश्चिम बंगाल से शैलेश विश्वकर्मा, दिल्ली से आत्मा राम पांचाल, कमलेश सिंह, संदीप विश्वकर्मा, डॉ. संजीव पोद्दार, नवीन शर्मा, राकेश शर्मा, सोनू विश्वकर्मा, जुगनू विश्वकर्मा जैसे दिग्गज नेताओं ने भी एक सुर में सत्ता में भागीदारी की जोरदार मांग उठाई।

रैली की खास बात रही महिलाओं की प्रभावशाली भागीदारी। सुजाता शर्मा, सुनीता सोनी, मीना शर्मा, पूनम मनी शर्मा जैसी ओजस्वी महिला नेताओं ने समाज की एकता, अधिकार और सम्मान की बात को पुरजोर ढंग से उठाया। कार्यक्रम का सफल संचालन भारतीय विश्वकर्मा महासंघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता दिवाकर शर्मा ने किया।

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