युद्ध के बीच शिवालिक से LPG ले कर पहुंचा अपना झारखंड का लाल… अदम्य साहस का दिया परिचय…

युद्ध के बीच शिवालिक से LPG ले कर पहुंचा अपना झारखंड का लाल… अदम्य साहस का दिया परिचय…

जमशेदपुर(JAMSHEDPUR): खाड़ी देशों में मचे घमासान के बीच जमशेदपुर के रहने वाले अंश त्रिपाठी ने अदम्य साहस का परिचय दिया है।अंश की अहम तकनीकी भूमिका की बदौलत शिपिंग कार्पोरेशन आफ इंडिया का विशाल जहाज शिवालिक 46 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर सुरक्षित भारत पहुंच चुका है।

दुनिया के सबसे संवेदनशील और खतरनाक समुद्री रास्ते होर्मुज जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार करते हुए यह जहाज अब गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर लंगर डाल चुका है।

इंडियन आयल के लिए यूएई, कतर और सऊदी अरब से गैस लेकर आना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। युद्ध की विभीषिका के बीच इस जहाज को अपना सफर तय करना पड़ा।

अंश इस मिशन में बतौर सेकंड इंजीनियर तैनात थे। उनके कंधों पर जहाज के पूरे तकनीकी संचालन की कमान थी। कैप्टन सुखमीत सिंह के नेतृत्व में 27 सदस्यों की टीम ने मौत के साये में भी गजब का संयम दिखाया।नवंबर 2025 में अपनी ड्यूटी पर गए अंश ने विषम परिस्थितियों में भी जहाज की रफ्तार और सुरक्षा में कोई तकनीकी चूक नहीं होने दी।

पारडीह के आशियाना वुडलैंड में रहने वाले अंश के परिवार के लिए बीता एक हफ्ता किसी बुरे सपने जैसा था। सफर के दौरान जब उनका परिवार से संपर्क पूरी तरह टूट गया, तो सभी की धड़कनें बढ़ गई थीं।

यूसीआइएल के सेवानिवृत्त उप-प्रबंधक पिता मिथिलेश कुमार त्रिपाठी और मां चंदा त्रिपाठी अनहोनी की आशंका से खौफ में थे।टाटा स्टील में चार्टर्ड अकाउंटेंट पत्नी चंदा मिश्रा त्रिपाठी ने बताया कि अब जहाज और क्रू के सुरक्षित देश लौटने की खबर से जान में जान आई है। घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

पढ़ाई में हमेशा से अव्वल रहे अंश ने मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल और एईसीएस नरवा (जादूगोड़ा) से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की है।इसके बाद उन्होंने साल 2012 में बीआईटी मेसरा से मैकेनिकल और 2015 में कोचीन शिपयार्ड से मरीन इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। दिसंबर 2014 से ही वे शिपिंग कॉर्पोरेशन का हिस्सा बनकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

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