नरेंद्र मोदी और अमित शाह की बीजेपी ने यह साबित करने के प्रयास में कोई कसर नहीं छोड़ी कि नेहरू-गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी या तो अदूरदर्शी हैं या देश के गद्दार। बीजेपी कहती है कि परिवार के तौर पर जवाहर लाल नेहरू से लेकर सोनिया-राहुल तक, सबने देश के हितों के खिलाफ सोचा जबकि नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह तक, कांग्रेसी सरकारों ने देश की मिट्टी पलीत कर दी। प्रायः यह साबित करने की कोशिश की जाती है कि इन कांग्रेसी सरकारों ने देश के लिए दूरदर्शी निर्णयों का त्याग इसलिए भी किया क्योंकि सबने हिंदू विरोधी, देश विरोधी और पाकिस्तान परस्त मुस्लिम समुदाय को खुश रखना सर्वोपरि दायित्व समझा।
बीजेपी कश्मीर और पाकिस्तान से जुड़ी नीतियों को मुस्लिम परस्त बताती है तो चीन के साथ व्यवहार में अदूरदर्शिता के उदाहरण गिनाते नहीं थकती। भाजपा मनमोहन सिंह सरकार को निर्णय लेने के मोर्चे पर बेहद डांवाडोल और बिल्कुल कमजोर बताकर न जाने कैसी-कैसी छींटाकशी किया करती है। इधर, बीजेपी खुद के साथ-साथ नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की छवि, देशहित के लिए सत्ता की भी परवाह नहीं करने वाले महा बलिदानी की, बनाने का भरसक प्रयास करती है। लेकिन इस नई बीजेपी और मोदी सरकार के 11 वर्षों में जो जमीन पर देखने को मिला, वो इन कोलाहली दावों से शायद ही मेल खाती है। बात शुरू करते हैं पाकिस्तान के साथ संघर्ष से।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन के मैदान में 24 भारतीय और एक नेपाली पर्यटकों को उनका धर्म पूछ-पूछकर सिर्फ हिंदू होने के कारण हत्या कर दी दी गई। इस्लामी इतिहास अपने पहले दिन से ऐसे मजहबी अत्याचारों से भरा है। भारत ने इस्लामी क्रूरता के कभी नहीं भरने वाले कई जख्म पाए। आजादी के बाद कश्मीर में हिंदुओं पर हुआ अत्याचार विश्व इतिहास में किसी एक समुदाय या नस्ल के खिलाफ सबसे बर्बरतापूर्ण कार्रवाइयों में एक है। फिर तो आतंकवाद का सिलसिलेवार शिकार होना जैसे हिंदुओं का दुर्भाग्य बन गया।
पहलगाम नरसंहार भारत में पाकिस्तान प्रयोजित इस्लामी आतंकवाद की न पहली घटना थी और न सबसे बड़ी। यह अलग सिर्फ इस मायने में था कि आतंकियों ने पाकिस्तान में बैठे आकाओं के निर्देश पर सोचा-समझा संदेश दिया कि मुसलमान नहीं हो तो मारे जाओगे। वैसे भी भारत में कभी किसी आतंकवादी घटना का निशाना मुसलमान नहीं हुआ करता है, पहलगाम में भी यही हुआ। आतंकवाद का जो शिकार हमेशा से होता रहा है, इस बार का भी टारगेट वही था- हिंदू।
पहलगाम में आतंकी जब अपने मंसूबे को अंजाम दे रहे थे, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब में थे। उन्होंने दौरा बीच में ही खत्म किया और भारत लौट आए। उसके बाद बिहार के मधुबनी की अपनी पहली सार्वजिक सभा में उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत स्पष्ट शब्दों में कहना चाहता हूं- जिन्होंने ये हमला किया है, उन आतंकियों को और इस हमले की साजिश रचने वालों को, उनकी कल्पना से भी बड़ी सजा मिलेगी। सजा मिलकरके रहेगी। अब आतंकियों की बची-खुची जमीन को भी मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है।’
अब जब मोदी सरकार ने पाकिस्तान से संग्राम पर विराम लगाने का फैसला कर लिया है और इस हद तक कर लिया है कि तीसरे घंटे में ही पाकिस्तान की तरफ से संघर्ष विराम की धज्जियां उड़ाना भी स्वीकार कर लिया गया। पाकिस्तान ने भारत तो छोड़िए, अमेरिका की भी खिल्ली उड़ाई। मुनीर ने इतना बड़ा हौसला दिखाया और मोदी ने क्या किया?
अगली कड़ी में मोदी की मजबूत नेता की छवि का परीक्षण, कुछ उदाहरणों के साथ।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

