धनबाद (NIRSA): झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा पर स्थित मैथन (बराकर नदी, 1957) और पंचेत (दामोदर नदी, 1959) बाँध, जो दामोदर घाटी परियोजना (DVC) के तहत बाढ़ नियंत्रण और बिजली उत्पादन के लिए बने थे, अब अपने अस्तित्व पर खतरा झेल रहे हैं। DVC से सेवानिवृत्त कर्मी पलायन को मजबूर हैं। धनबाद के सांसद ढुलू महतो ने संसद भवन में इस मुद्दे को उठाया है।
उन्होंने कहा है कि DVC ने विस्थापितों से किए गए वादे पूरे नहीं किए हैं।60% से 70% विस्थापितों को अभी तक नियोजन (रोजगार) का लाभ नहीं मिला है, जबकि पश्चिम बंगाल के लोगों को अवसर मिले हैं।झारखंड के विस्थापित, जो नौकरी की उम्मीद में अपनी जान गंवा चुके हैं, उनके परिजन आज दिहाड़ी मजदूरी करने को मजबूर हैं।उन्होंने बुनियादी सुविधाओं (पानी, बिजली, सड़क) की कमी को भी उजागर किया है।
स्वरोजगार के लिए ग्रामीणों को दिए जाने वाले छोटे-छोटे टेंडर को ग्लोबल टेंडरिंग प्रक्रिया के कारण बंद कर दिया गया है, जिससे हजारों लोग बेरोजगार हुए हैं।
भाजपा का उलगुलान (आंदोलन): भाजपा के वरिष्ठ नेता जयप्रकाश सिंह ने कहा है कि DVC द्वारा कार्यालय बंद किए जा रहे हैं और वर्तमान में अकाउंट सेक्शन को भी स्थानांतरित किया जा रहा है, जिससे पलायन बढ़ रहा है।
श्री सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि DVC नहीं सुधरता है, तो नेता प्रतिपक्ष बाबू लाल मरांडी और धनबाद सांसद ढुलू महतो के नेतृत्व में एक जोरदार आंदोलन किया जाएगा। जयप्रकाश सिंह ने सांसद ढुलू महतो के विकास कार्यों की सराहना की है, जिसमें सड़क, गली और राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए किए गए संघर्ष शामिल हैं।
निष्कर्ष: भाजपा मैथन और पंचेत के स्थानीय लोगों के रोजगार, विस्थापन, बुनियादी सुविधाओं और DVC कार्यालयों के स्थानांतरण के मुद्दों को लेकर जल्द ही एक बड़ा आंदोलन करने की तैयारी में है।
NEWSANP के लिए निरसा से संतोष की रिपोर्ट

