एसआईटी गठन की मांग को लेकर एसपी को सौंपा ज्ञापन
जामताड़ा(JAMTADA):पिपला के गुस्साए ग्रामीणों ने गुरुवार को परंपरागत हथियारों से लैस होकर मिहिजाम थाने पर उग्र प्रदर्शन किया। महिलाओं के हाथ में तलवार, कुल्हाड़ी, तीर, झाड़ू और बरछा जैसे हथियार थे। 5 वर्षीय बच्ची मति मुर्मू की नृशंस हत्या के सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। इस घटना ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व जन सेवा पार्टी के संयोजक राकेश लाल ने किया। उन्होंने पुलिस अधीक्षक (एसपी) को एक ज्ञापन भी सौंपा। जिसमें उन्होंने निष्पक्ष और गहन जांच की गारंटी के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन की मांग की।
क्या हुआ?
दो महीने पहले पिपला गांव के तलाब में एक मासूम बच्ची मति मुर्मू का शव मिला। इस दुखद घटना के बाद से लोगों में आक्रोश है। जिससे पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। बच्ची के पिता की शिकायत पर पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उसके बाद पुलिस अन्य आरोपी को पकड़ने में लापरवाह है।
कौन थे शामिल?
थाने पर विरोध प्रदर्शन में महिलाओं और युवाओं समेत सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लिया । पुलिस प्रशासन के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया। विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व जन सेवा पार्टी के संयोजक राकेश लाल ने किया। जिन्होंने मामले में पुलिस के रवैये पर असंतोष जताया। थाना प्रभारी विवेकानंद दुबे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिस बल को कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात किया गया था। एहतियात के तौर पर थाने का मुख्य द्वार बंद रखा गया था।
ग्रामीण ने क्यों विरोध किया?
ग्रामीणों ने दावा किया कि पुलिस एक गिरफ्तारी के बावजूद अन्य अपराधियों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने में विफल रही है। वे पोस्टमार्टम रिपोर्ट से विशेष रूप से नाखुश हैं। जिससे इसकी सटीकता और पारदर्शिता पर संदेह पैदा हो रहा है। प्रदर्शनकारी निष्पक्ष जांच और सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का अनुरोध कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारी क्या चाहते हैं?
ग्रामीणों की ओर से बोलते हुए राकेश लाल ने कहा, “हम पोस्टमार्टम रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हैं। हमें इसमें लीपापोती का संदेह है। हम मांग करते हैं कि एसपी मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन करें। अगर एक सप्ताह के भीतर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। तो हम अपना आंदोलन तेज करेंगे और एसपी कार्यालय का घेराव करेंगे।”
पुलिस क्या करती है?
बढ़ते उपद्रव के जवाब में थाना प्रभारी विवेकानंद दुबे ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि एक आरोपी को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया है । प्रदर्शनकारियों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन को एसपी को भेज दिया गया है। उन्होंने वादा किया कि एसपी के आदेश के बाद अतिरिक्त कार्रवाई की जाएगी।
इसमें शामिल कानूनी प्रावधान:
- भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) – आरोपी पर हत्या का आरोप लगाया गया है। जिसके लिए मौत या आजीवन कारावास के साथ-साथ जुर्माने का प्रावधान है।
- आईपीसी की धारा 201 (साक्ष्यों को गायब करना) – यदि यह साबित हो जाता है कि साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की गई है। तो अपराधियों को 7 साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है।
- यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012
- यदि यौन उत्पीड़न का संदेह है, तो आरोपी को आजीवन कारावास या मृत्युदंड सहित कठोर सजा का सामना करना पड़ सकता है।
- दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 154 (एफआईआर पंजीकरण) –
पुलिस ने पिता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करके एक आरोपी को गिरफ्तार किया।
- एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन:
सीआरपीसी की धारा 173(8) के अनुसार, यदि प्रारंभिक जांच अपर्याप्त लगती है। तो अतिरिक्त जांच करने के लिए एसआईटी का गठन किया जा सकता है।
स्थिति कैसे विकसित हुई?
भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद माहौल तनावपूर्ण रहा । प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी जारी रखी। हालांकि, स्थिति नियंत्रण में रही और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
आगे क्या होगा?
ग्रामीणों ने पुलिस को सभी दोषियों को गिरफ्तार करने और एसआईटी का गठन करने के लिए एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं। तो वे विरोध प्रदर्शन को तेज करने और एसपी कार्यालय का घेराव करने की योजना बना रहे हैं।
मती मुर्मू की नृशंस हत्या ने पूरे समुदाय को शोक और भय में डाल दिया है। ग्रामीण न्याय और अपराधियों के लिए सख्त सजा की मांग कर रहे हैं। इस दुखद घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा और ऐसे गंभीर अपराधों से निपटने में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की दक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
NEWSANP के लिए जामताड़ा से आर पी सिंह की रिपोर्ट

