मुख्य वक्ता डॉ. पीजुस मालपहारिया ने ग्रीन केमिस्ट्री के 12 सिद्धांतों पर किया विस्तार से विवेचन, छात्रा निकिता कुमारी ने प्रभावशाली प्रस्तुति से बटोरी तालियाँ
मिहिजाम (जामताड़ा): डिग्री महाविद्यालय मिहिजाम के रसायन शास्त्र विभाग द्वारा आज “ग्रीन केमिस्ट्री” विषय पर एक दिवसीय विभागीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. कृष्ण मोहन साह की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य रसायन विज्ञान के क्षेत्र में पर्यावरण के अनुकूल उपायों को बढ़ावा देना और छात्रों को हरित रसायन के महत्व से परिचित कराना था।
मुख्य वक्ता का ओजस्वी संबोधन: डॉ. पीजुस मालपहारिया
- संगोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉ. पीजुस मालपहारिया (विभागाध्यक्ष, रसायन शास्त्र, जामताड़ा कॉलेज) ने हरित रसायन (Green Chemistry) की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डाला।
- उन्होंने बताया कि हरित रसायन का मूल उद्देश्य रासायनिक प्रक्रियाओं को इस प्रकार डिजाइन करना है जिससे पर्यावरण प्रदूषण को न्यूनतम किया जा सके।
- डॉ. मालपहारिया ने हरित रसायन के 12 सिद्धांतों की गहराई से व्याख्या की, जिसमें रासायनिक अपशिष्ट को कम करना, ऊर्जा दक्षता बढ़ाना, और खतरनाक पदार्थों के विकल्प विकसित करना शामिल है।
- उन्होंने कहा, “केवल वैज्ञानिक अनुसंधान नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता और नीति-निर्माण का समन्वय भी जरूरी है ताकि रसायन विज्ञान मानवता के हित में कार्य कर सके।”
संचालन में जानकारी और प्रेरणा: डॉ. राकेश रंजन
- कार्यक्रम का मंच संचालन रसायन शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश रंजन ने किया, जिन्होंने ग्रीन केमिस्ट्री के वैज्ञानिक और व्यावहारिक पक्ष को सरल भाषा में श्रोताओं के सामने प्रस्तुत किया।
- उन्होंने कहा कि हरित रसायन केवल प्रयोगशाला की अवधारणा नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक पर्यावरणीय अभियान है, जिसका संबंध कृषि, उद्योग और ऊर्जा सभी से है।
- उन्होंने ऑर्गेनिक फार्मिंग से जुड़ी हरित रसायन की संभावनाओं का भी उल्लेख किया और कहा कि इस क्षेत्र में आगे शोध की अत्यधिक आवश्यकता है।
छात्रा निकिता कुमारी की प्रभावशाली प्रस्तुति
- संगोष्ठी में रसायन विभाग की छात्रा निकिता कुमारी ने ग्रीन केमिस्ट्री विषय पर अत्यंत प्रभावशाली और शोधपरक भाषण दिया।
- उनकी प्रस्तुति ने सभागार में मौजूद शिक्षकों और छात्रों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने उदाहरणों सहित बताया कि किस प्रकार आधुनिक जीवनशैली को हरित रसायन के साथ जोड़ा जा सकता है।
प्राचार्य का प्रेरणादायक वक्तव्य: प्रो. कृष्ण मोहन साह
- महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. कृष्ण मोहन साह ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि रसायन विज्ञान के सही अनुप्रयोग से हम पर्यावरण संकट की दिशा में उल्लेखनीय बदलाव ला सकते हैं।
- उन्होंने मीथेन गैस, उत्प्रेरक (कैटेलिस्ट) आदि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सरल वैज्ञानिक उपायों से भी वायुमंडलीय प्रदूषण कम किया जा सकता है।
- प्रो. साह ने आज के युग में कूलर और एसी के अंधाधुंध प्रयोग से बढ़ते तापमान पर चिंता व्यक्त करते हुए सुझाव दिया कि “हर घर एक पेड़” लगाना चाहिए ताकि तापमान नियंत्रण और प्रदूषण नियंत्रण एक साथ सुनिश्चित हो सके।
- उन्होंने मुख्य वक्ता डॉ. मालपहारिया को प्रशंसा पत्र भेंट करते हुए उनके सक्रिय सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी इसी प्रकार मार्गदर्शन की अपेक्षा जताई।
धन्यवाद ज्ञापन और सहभागिता
- कार्यक्रम में IQAC समन्वयक डॉ. सोमेन सरकार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और आयोजन को सफल बनाने में सभी के योगदान की सराहना की।
- इस अवसर पर महाविद्यालय के अनेक शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे जिनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित गणमान्यजन सम्मिलित थे:
- प्रो. बी. पी. गुप्ता
- जयश्री, पुष्पा टोप्पो, पूनम कुमारी
- डॉ. के. के. बरनवाल, राम प्रकाश दास
- देवकी पंजियारा, सतीश कुमार शर्मा
- संजय सिंह, उपेंद्र पाण्डेय
- रेखा कुमारी, पंचनाथ मुर्मू
- पीयूष कुमार दास सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं।
निष्कर्ष: विज्ञान और पर्यावरण की दिशा में सार्थक पहल
यह संगोष्ठी न केवल अकादमिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रही, बल्कि इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि विज्ञान, विशेष रूप से रसायन विज्ञान, पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान बन सकता है। ग्रीन केमिस्ट्री जैसे विषयों को विद्यार्थियों के बीच लोकप्रिय बनाना और इसके शोध को प्रोत्साहित करना समय की मांग है।
डिग्री महाविद्यालय मिहिजाम द्वारा आयोजित यह संगोष्ठी निश्चित रूप से एक प्रेरणास्पद कदम है जो आने वाले समय में स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक चेतना के विकास में सहायक सिद्ध होगी।
NEWSANP के लिए जामताड़ा से आर पी सिंह की रिपोर्ट

