यादों के झरोखों से बिहार विस चुनाव 1990
माई, हम मुख्यमंत्री बन गयीनी..
इ का होला..
इ जे हथुआ महाराज बाड़न, उनको से बड़.
अच्छा ठीक का जाय दे, लेकिन तहरा सरकारी नौकरी ना नु मिलल…
(मुख्यमंत्री बनने के बाद लालू यादव की अपनी मां मरछिया देवी से ये पहली बातचीत थी)
पटना(BIHARI) :बात आज से 25 साल पहले की है. साल था 1990. बिहार की राजनीति में बदलाव की बयार बह रही थी. कांग्रेस पतन की ओर थी. भागलपुर दंगे ने उसकी ताबूत पर आखिरी कील ढोकने का काम किया था. जेपी आंदोलन से उभरे नेताओं का कद बढ़ रहा था.
बिहार विधानसभा चुनाव 1990: कांग्रेस का पतन, जनता दल का उभार
तब बिहार-झारखंड एक राज्य था. प्रदेश में कुल 324 विधानसभा सीटें थी. 1990 के विधानसभा चुनाव में जनता दल 122 सीटों पर जीत कर सबसे बड़ी पार्टी बनी. 323 सीटों पर लड़ने वाली कांग्रेस को मात्र 71 सीटों पर जीत मिली. भाजपा ने 237 सीटों पर लड़कर 39 पर जीत हासिल की. नतीजे बता रहे थे कि बिहार अब बदलाव की ओर है.
1990 में सीएम के 3 दावेदार थे- लालू, राम सुदंर दास और रघुनाथ झा
1990 के चुनावी नतीजों को बाद बिहार में मुख्यमंत्री के तीन बड़े दावेदार थे- लालू यादव, राम सुंदर दास और रघुनाथ झा. तब के प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह राम सुंदर दास को सीएम बनाना चाहते थे. उप-प्रधानमंत्री देवीलाल लालू यादव के पक्ष में थे. नीतीश भी लालू यादव के पक्ष में ही थे.उस समय केंद्र की राजनीति में चंद्रशेखर और विश्वनाथ प्रताप सिंह दो प्रमुख केंद्र थे. लेकिन दोनों में बनती नहीं थी. बिहार के चुनावी नतीजों के बाद चंद्रशेखर ने अपना दबदबा दिखाने के लिए रघुनाथ झा का नाम आगे कर दिया.
राम सुंदर दास और रघुनाथ झा को पीछे छोड़ कैसे सीएम बने लालू
पद एक, दावेदार तीन… फिर तय हुआ कि वोटिंग के जरिए नेता का चुना जाए… जैसी ही बात वोटिंग की हुई, विधायकों की लाइजनिंग शुरू हो चुकी थी. तय समय पर विधायकों एकजुट कर वोटिंग कराया गया. यूं तो सीएम रेस की सीधी फाइट लालू और राम सुंदर दास में थी. लेकिन रघुनाथ झा की एंट्री ने लालू को मामूली वोटों के अंतर से जीत दिला दी. रघुनाथ झा को तब राजपूत विधायकों के कुछ मिले, जिससे लालू मात्र 3 वोट के अंतर से मुख्यमंत्री पद के लिए चुने गए.
10 मार्च 1990 को 46 साल की उम्र में सीएम बने लालू यादव
10 मार्च को 1990 को मात्र 46 साल की उम्र में लालू प्रसाद ने बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. शपथ ग्रहण समारोह पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित हुआ. जहां लोगों की भारी भीड़ लालू में बिहार के नए नायक का अक्श देखने के लिए उमड़ी थी. इस रोज बिहार को एक ऐसा मुख्यमंत्री मिला, जो पटना के पशु चिकित्सालय महाविद्यालय में अपने चपरासी भाई के क्वार्टर में रहता था.
2015 में लालू ने खुद बताया मां से मुलाकात का यह रोचक किस्सा
लालू और उनकी मां से बातचीत का यह किस्सा खुद लालू प्रसाद यादव ने साल 2015 में फेसबुक पर लिखा था. 10 मार्च को हर साल मदर्स डे मनाया जाता है. उसी दिन 2015 में लालू ने सीएम बनने के बाद मां के साथ हुई पहली बातचीत का ये रोचक किस्सा फेसबुक पर साझा किया था.
NEWSANP के लिए बिहार से ब्यूरो रिपोर्ट

