माँ केरा का दिव्य रहस्य: 400 वर्षों की अनूठी विरासत…

माँ केरा का दिव्य रहस्य: 400 वर्षों की अनूठी विरासत…

क्या आप जानते हैं कि चक्रधरपुर के केरा गाँव में विराजमान माँ भगवती की यह प्रतिमा 500 साल से भी अधिक पुरानी मानी जाती है?
कहा जाता है कि एक रहस्यमयी सन्यासी इस सिद्ध प्रतिमा को काउरीकामाख्या से अपने साथ लेकर आए थे। माँ ने नदी किनारे एक विशाल बरगद के पेड़ को अपना स्थायी निवास चुना और सन्यासी ने वहीं अपना जीवन माँ की सेवा में समर्पित कर दिया।

अद्भुत पौराणिक कथा:
सन्यासी के ब्रह्मलीन होने के बाद, केरा के राजा ठाकुर लोकनाथ सिंहदेव को माँ ने स्वप्न में दर्शन दिए। माँ ने आदेश दिया— “मैं तुम्हारे राज्य की रक्षा के लिए यहाँ आ बसी हूँ, मेरी उपासना करो और यहाँ मंदिर का निर्माण करो।” तभी से केरा राजपरिवार माँ के संरक्षक के रूप में सेवा कर रहा है।

छऊ नृत्य का चमत्कार:
मान्यता है कि माँ एक बार स्वयं एक सुंदर युवती का रूप धरकर छऊ नृत्य देखने आई थीं! उनकी उसी प्रसन्नता के सम्मान में आज भी हर साल 13 अप्रैल को मंदिर के सामने भव्य छऊ नृत्य का आयोजन होता है।

अटूट आस्था और कठिन तप:
यहाँ भक्त अपनी मुरादें पूरी करने के लिए नंगे पैर धधकते अंगारों पर चलते हैं (अग्निपथ) और कांटों की शय्या पर सोते हैं। यह भक्ति और शक्ति का एक ऐसा मिलन है जिसे देख कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

NEWSANP के लिए अमित चौहान की रिपोर्ट

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *