भोपाल(BHOPAL) : मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के सातवें दिन यानी मंगलवार को महिला अपराध को लेकर पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में राज्य सरकार ने जो आंकड़े पेश किए, वे चौंकाने वाले हैं। कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के सवाल पर गृह विभाग द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2025 से जून 2025 के बीच प्रदेश में 3742 दुष्कर्म के मामले दर्ज किए गए। इनमें पीड़िताएं अनुसूचित जाति (905), जनजाति (1143), ओबीसी (1228) और सामान्य वर्ग (466) से थीं।
इसी अवधि में 120 महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार (गैंगरेप) की भी पुष्टि हुई। वर्ष 2024 में कुल 319 गैंगरेप के मामले दर्ज किए गए थे, लेकिन उनमें से सिर्फ 5 मामलों में ही दोषियों को सजा मिली। यानी सजा दर केवल 1.6% रही। बलात्कार के सभी मामलों में कुल सजा दर 2.79% रही। तुलनात्मक रूप से वर्ष 2018 में सजा दर कहीं बेहतर थी — गैंगरेप मामलों में 16.25% और बलात्कार में 12.43%।
महिलाओं के अपहरण के मामलों में भी तेज़ बढ़ोतरी देखने को मिली है। वर्ष 2018 में जहां 6394 केस दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या 10,070 तक पहुंच गई – यानी 53% की बढ़ोतरी। सिर्फ जनवरी से जून 2025 के बीच ही 5868 अपहरण के मामले दर्ज हो चुके हैं।
विधायक प्रताप ग्रेवाल ने सरकारी आंकड़ों में विरोधाभास को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 के वार्षिक प्रतिवेदन में बलात्कार के 5592 केस दर्ज बताए गए थे, जबकि विधानसभा में दिए गए उत्तर में यह संख्या 8518 बताई गई — जो 60% का अंतर है।
इस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सफाई दी कि रिपोर्टिंग की तारीख और अपराध की पुष्टि के बीच समय अंतर होने से आंकड़ों में फर्क आ सकता है। कई बार अपहरण की जांच के बाद यदि बलात्कार की पुष्टि होती है, तो केस की श्रेणी बदल दी जाती है।
विधायक ग्रेवाल ने सरकार पर आरोप लगाया कि इतने बड़े अंतर वाले आंकड़े यह दर्शाते हैं कि राज्य सरकार मामलों को छिपाने या कम करके दिखाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने महिला अपराध की बढ़ती घटनाओं और न्याय की बेहद कम दर को राज्य सरकार की विफलता बताया और गंभीर चिंता जताई।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

