धनबाद (झारखंड) के जेसी मलिक रोड निवासी आशीष रंजन सिंह उर्फ छोटू महज 28 साल की उम्र में जरायम की दुनिया में आतंक का पर्याय बन गया था। हत्या, रंगदारी, लूट और सुपारी किलिंग जैसे कुल 15 आपराधिक मामले उसके खिलाफ धनबाद में दर्ज हैं। अपने ही गुरु गैंगस्टर अमन सिंह की दिसंबर 2023 में धनबाद जेल के अंदर हत्या कराने के बाद आशीष रंजन गैंग का सरगना बन गया था। उसे खुद की ऑडियो क्लिक वायरल कर इसकी जिम्मेदारी तक ली थी। एसटीएफ की मानें तो आशीष रंजन का नाम पहली बार वर्ष 2019 में धनबाद के वीर कुंवर सिंह कॉलोनी निवासी जमीन कारोबारी समीर मंडल की हत्या में आया था।
इसमें आशीष रंजन की गिरफ्तारी भी हुई थी, लेकिन जमानत पर बाहर आने के बाद वह खुलेआम हत्या, रंगदारी मांगने और सुपारी किलिंग का काम करने लगा। कोयलांचल धनबाद में अपना आधिपत्य जमाने के लिए उसने 2021 में अपने साथियों के साथ मिलकर कोयला व्यापारी नीरज तिवारी की हत्या की थी। इसी साल सफुल हसन उर्फ लाला की सुपारी लेकर उसकी भी हत्या कर दी। इसके बाद 2022 में धनबाद में झरिया निवासी टायर शोरूम के मालिक रंजीत साव की हत्या कराई। जबकि वर्ष 2023 में वर्चस्व को लेकर अम्बेडकर नगर उत्तर प्रदेश निवासी धनबाद जेल में निरुद्ध अमन सिंह की हत्या कराई थी। आशीष ने इसी साल अपने साथियों के साथ मिलकर बरवड्डा निवासी जमीन कारोबारी राजकुमार साव की हत्या की थी। एसटीएफ पर चलाईं 15 गोलियां शंकरगढ़ में एसटीएफ से मुठभेड़ के दौरान आशीष रंजन उर्फ छोटू ने एके 47 से लगभग 15 राउंड गोलियां चलाई थीं। यह गनीमत थी कि उसकी ताबड़तोड़ फायरिंग में एसटीएफ निरीक्षक समेत अन्य जवान बाल-बाल बच गए। एसटीएफ और प्रयागराज पुलिस उसके फरार साथी की तलाश में जुटी है ताकि प्रयागराज में आशीष रंजन किस बड़ी वारदात को अंजाम देने आया था, इसका पता लग सके।
NEWSANP के लिए धनबाद से ब्यूरो रिपोर्ट

