जामताड़ा(JAMTADA):दुर्गापुर के एक निजी अस्पताल में जीवन और मौत से संघर्ष कर रहे डकैती कांड के पीड़ित अमन वर्मा से मिलने स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पहुंचे। यह मुलाकात केवल एक औपचारिक हालचाल तक सीमित नहीं रही। बल्कि जामताड़ा के जनमानस को भीतर तक झकझोर देने वाली साबित हुई। मंत्री के सामने अमन वर्मा के मुंह से निकले शब्द— “मंत्री जी, मुझे बचा लीजिए”—ने माहौल को भावुक कर दिया। मंत्री इरफान अंसारी स्वयं भी इस क्षण में भावुक हो उठे। यह दृश्य जनता और जनप्रतिनिधि के बीच आत्मीय जुड़ाव और मानवीय संवेदना का जीवंत प्रमाण बन गया।
इस मुलाकात की जानकारी स्वास्थ्य मंत्री के विधायक प्रतिनिधि अजहरुद्दीन ने रविवार शाम 7:29 बजे सोशल मीडिया ग्रुप में साझा की। देखते ही देखते यह खबर आग की तरह फैल गई। जामताड़ा के एक मीडिया कर्मी द्वारा इस मुलाकात को संवेदनशील शब्दों की “चासनी” में लपेट कर साझा किया गया, जिसके बाद खबर ने जबरदस्त ट्रेंड पकड़ लिया। सोशल मीडिया पर लोगों की भावनाएं उमड़ पड़ीं—कहीं गुस्सा, कहीं दर्द और कहीं व्यवस्था से सवाल।
गोलीकांड से पहले ही सहमे जामताड़ा में जैसे-जैसे रात गहराती गई, अनहोनी का भय और गाढ़ा होता चला गया। सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि घटना के एक सप्ताह बाद भी अपराधी पुलिस की पकड़ से बाहर क्यों है? जनता की अपेक्षाएं, पीड़ित का असहनीय दर्द और मंत्री के सख्त रुख का असर आखिरकार पुलिस प्रशासन पर पड़ा।
पुलिस अधीक्षक राजकुमार मेहता ने आनन-फानन में बड़ी कार्रवाई करते हुए लापरवाही के आरोप में कई पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। इस कार्रवाई की जानकारी जिला के सोशल मीडिया हैंडलर संतोष कुमार ने जामताड़ा पुलिस मीडिया व्हाट्सएप ग्रुप में साझा की।
की गई कार्रवाई इस प्रकार है:
- जामताड़ा थाना क्षेत्र में अपराध नियंत्रण में विफलता और आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने में लापरवाही के आरोप में जामताड़ा थाना प्रभारी पु०नि० श्री संतोष कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया।
- 25/26 दिसंबर 2025 की रात मिहिजाम थाना क्षेत्र अंतर्गत शिर्डी ज्वेलरी दुकान में हुई चोरी की घटना के दौरान लापरवाही बरतने के आरोप में मिहिजाम थाना की रात्रि गश्ती टीम के ASI अजय कुमार, आरक्षी परमेश्वर मंडल, आरक्षी मनबोध कुमार सिंह तथा टाइगर मोबाइल के आरक्षी निशांत चक्रवर्ती और प्रदीप दास को निलंबित कर लाइन हाजिर किया गया।
एसपी की इस कार्रवाई को जनआक्रोश को शांत करने की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है। हालांकि, आम लोगों के मन में एक तीखा सवाल अब भी तैर रहा है—क्या केवल पदाधिकारियों और जवानों को निलंबित करने से यह अपराधी पकड़े जाएंगे? यदि जवाब ‘न’ है, तो क्या जामताड़ा के लोग यूं ही भय और आतंक की काली छाया में जीने को मजबूर रहेंगे?
जामताड़ा आज जवाब मांग रहा है—भावनाओं से नहीं, ठोस कार्रवाई से।
NEWSANP के लिए आर पी सिंह की रिपोर्ट

