लंदन: ब्रिटेन की राजनीति में उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया, जब प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की सरकार को एक और झटका लगा। प्रधानमंत्री के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी ने रविवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एप्सटीन से जुड़े दस्तावेजों में सामने आए नए खुलासों के बाद दिया गया है, जिससे लेबर सरकार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
एप्सटीन फाइल्स में पीटर मैंडेलसन का नाम
अमेरिकी प्रशासन द्वारा हाल ही में सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों में यह खुलासा हुआ है कि पीटर मैंडेलसन, जो ब्रिटेन के पूर्व राजदूत (वॉशिंगटन) रह चुके हैं और प्रधानमंत्री स्टारमर के करीबी माने जाते हैं, ने एप्सटीन से अपने संबंध स्वीकार करने से कहीं अधिक लंबे समय तक बनाए रखे थे। इससे पहले मैंडेलसन यह दावा कर चुके थे कि एप्सटीन से उनका संपर्क सीमित और काफी पुराना था, लेकिन नए दस्तावेजों ने इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला यहीं नहीं रुका। पुलिस अब उन ईमेल्स की भी जांच कर रही है, जिनसे संकेत मिलता है कि 2008 के वैश्विक बैंकिंग संकट के बाद पीटर मैंडेलसन ने आंतरिक वित्तीय चर्चाओं से जुड़ी जानकारियां एप्सटीन को साझा की थीं। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला केवल नैतिकता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सरकारी गोपनीयता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन सकता है।
स्टारमर सरकार पर बढ़ता दबाव
इन खुलासों का सीधा असर प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की राजनीतिक स्थिति पर पड़ा है। मॉर्गन मैकस्वीनी को स्टारमर के सबसे भरोसेमंद और लंबे समय से जुड़े सहयोगियों में गिना जाता था। ऐसे में उनका इस्तीफा प्रधानमंत्री के नेतृत्व के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर उस समय जब लेबर पार्टी के भीतर ही असंतोष के स्वर उभर रहे हैं।
विपक्ष का हमला, सरकार की सफाई
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार ने इस पूरे मामले को लंबे समय तक दबाने की कोशिश की और पारदर्शिता की कमी दिखाई। वहीं सरकार की ओर से बयान जारी कर कहा गया है कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा और यदि कोई भी व्यक्ति दोषी पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

