धनबाद(DHANBAD): बीसीसीएल और JRDA के बेलगड़िया टाउनशीप पुनर्वास परियोजना में सामने आए जमीन विवाद ने हजारों विस्थापित परिवारों की उम्मीदों पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। बीसीसीएल द्वारा झरिया के अग्नि प्रभावित इलाकों से लोगों को बसाने के लिए अधिग्रहित की गई 378.39 एकड़ जमीन अब नए सर्वे में “गैर आबाद” यानी सरकारी दर्ज हो गई है। इससे जमीन के स्वामित्व को लेकर गंभीर उलझन पैदा हो गई है।
पुराने सर्वे के आधार पर अधिग्रहण और नए सर्वे में बदली जमीन की प्रकृति ने पूरे मामले को जटिल बना दिया है। म्यूटेशन प्रक्रिया रुकने से न केवल जमीन का हस्तांतरण अटका है, बल्कि 15 हजार से अधिक परिवारों के पुनर्वास का लक्ष्य भी खतरे में पड़ गया है। एनजीडीआरएस की प्रतिबंधित सूची में जमीन दर्ज होने के कारण रजिस्ट्रेशन भी संभव नहीं हो पा रहा है।
मुरारी नायक ने स्वीकार किया कि पुराने और नए रिकॉर्ड में अंतर है, जिसे दूर किए बिना आगे की प्रक्रिया संभव नहीं है। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि अब इस विवाद का समाधान केवल सिविल कोर्ट के जरिए ही निकल सकता है।
करीब 5940 करोड़ की इस परियोजना के तहत 18 हजार से अधिक आवास प्रस्तावित हैं, जिनमें से बड़ी संख्या तैयार भी हो चुकी है। लेकिन जमीन विवाद के कारण 2028 तक पुनर्वास का लक्ष्य अधर में लटकता दिख रहा है। ऐसे में अब सवाल यह है कि जिम्मेदारी किसकी है और हजारों परिवारों को उनका अधिकार कब मिलेगा।
NEWSANP के लिए धनबाद से कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट

