बेंगलुरू में इंजीनियर ने वीडियो कॉल पर रो-रोकर दिया इस्तीफा, वजह जान गुस्से से भर गए लोग…

बेंगलुरू में इंजीनियर ने वीडियो कॉल पर रो-रोकर दिया इस्तीफा, वजह जान गुस्से से भर गए लोग…

बेंगलुरू(BENGLURU) : बेंगलुरू के युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर की यह कहानी लिंक्डइन पर स्टोरी टेलर श्रवण टिक्कू द्वारा शेयर की गई एक पोस्ट के माध्यम से सामने आई, जिसमें उन्होंने इस सिचुएशन को ऑफिस के ‘टॉक्सिक कल्चर’ से कहीं अधिक बताते हुए इसे एक तरह का ‘ट्रॉमा’ करार दिया.
बेंगलुरू में इंजीनियर ने वीडियो कॉल पर रो-रोकर दिया इस्तीफा, वजह जान गुस्से से भर गए लोग
वीडियो कॉल पर रो-रोकर दिया
बेंगलुरू में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने हाल ही में हुई एक वीडियो कॉल मीटिंग के दौरान रो-रोकर इस्तीफा दे दिया. जैसे ही यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हुई, नेटिजन्स के बीच वर्क प्लेस पर ‘टॉक्सिक कल्चर’ को लेकर फिर से नई बहस छिड़ गई. कथित तौर पर युवा इंजीनियर ने जूम मीटिंग के दौरान अपने मैनेजर से एक प्रोजेक्ट के बारे में समझने की कोशिश की थी, लेकिन बॉस ने उसे गाइड करने के बजाय सार्वजनिक रूप से उसे अपमानित करना शुरू कर दिया.
सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने इसलिए रिजाइन नहीं किया कि वह ठीक से परफॉर्म नहीं कर पा रहा था, बल्कि उसने सिर्फ इसलिए इस्तीफा दे दिया क्योंकि ऑफिस का माहौल बर्दाश्त के बाहर हो गया था. युवा इंजीनियर की यह कहानी लिंक्डइन पर प्रोडक्ट मैनेजमेंट एडवाइजर और स्टोरी टेलर श्रवण टिक्कू ने शेयर की है. उन्होंने इस सिचुएशन को ऑफिस के ‘टॉक्सिक कल्चर’ से कहीं अधिक बताते हुए इसे एक ‘ट्रॉमा’ करार दिया है.
पोस्ट के अनुसार, इंजीनियर ने कहा कि वह गूगल मीट के दौरान इसलिए रोया, क्योंकि उसने एक प्रोजेक्ट को लेकर अपने मैनेजर से स्पष्टता की मांग की थी. इस पर मैनेजर ने उसे गाइड करने के बजाय सार्वजनिक रूप से उसे अपमानित किया. इंजीनियर ने कहा, मैंने सिर्फ चीजों को बेहतर ढंग से समझने के लिए कुछ सवाल किए. लेकिन जवाब मिला, खुद फिगर आउट करो।
‘तारीफ की उम्मीद नहीं, पर जलील भी मत करो’
इंजीनियर ने कहा, मैनेजर के मुंह से प्रशंसा की उम्मीद तो छोड़ ही दी है. लेकिन हम यह जरूर उम्मीद करते हैं कि दूसरों के सामने जलील भी न किया जाए. युवा इंजीनियर ने आरोप लगाया कि मैनेजर हमेशा अजीब समय पर फोन करता था. वहीं, जब परेशान होकर उसने इस्तीफा दिया, तो नई जॉब ढूंढ लेने के लिए बधाई देते हुए कहा कि देखते हैं वहां कितने समय तक टिकते हो.

यह एक ट्रॉमा है’
श्रवण टिक्कू की यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई और ऑफिस के टॉक्सिक कल्चर पर नेटिजन्स ने अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की. एक यूजर ने कमेंट किया, एक अच्छे नेतृत्व का अभाव किसी कर्मचारी के कॉन्फिडेंस और उसकी मेंटल हेल्थ पर कितना गहरा प्रभाव डाल सकता है, यह उसका सटीक उदाहरण है. दूसरे यूजर ने कहा, एक खराब मैनेजर सबसे जुनूनी लोगों को भी बर्बाद कर सकता है. एक अन्य यूजर ने लिखा, कोई भी कंपनी खराब नहीं होती, बल्कि वो मैनेजर ही हैं जिनकी वजह से संस्थान की छवि धूमिल होती है.

NEWSANP के लिए बेंगलुरु से ब्यूरो रिपोर्ट

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